जम्मू, 6 मार्च। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की अपार संभावनाओं को लेकर बड़ी बाते कही हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता सुधार परियोजना (जेकेसीआईपी) जैसी पहल एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ाने और नवाचार-संचालित उद्यमों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
गुरुवार को जम्मू-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी), जम्मू में जेकेसीआईपी के अंतर्गत आयोजित स्टार्टअप आउटरीच कार्यक्रम को मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने संबोधित किया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय और जम्मू एवं कश्मीर के कृषि उत्पादन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इस दौरान सीएम उमर अब्दुल्ला ने जोर दिया कि युवाओं को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता का लाभ उठाकर नौकरी चाहने वालों से रोजगार देने वाला बनना चाहिए।
केंद्र शासित प्रदेश में कृषि की संभावनाओं पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम यह तय करते हैं कि कौन सा उद्योग स्थापित किया जाना चाहिए? उसमें क्या संभावनाएं हैं? और यदि सफलता की अपार संभावनाएं हैं, तो वह कृषि है। और कृषि के साथ ही हम इस प्रकार के उद्योग स्थापित करने का निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक गलत धारणा है कि जम्मू एवं कश्मीर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर है।
उन्होने कहा कि जब मैं लोगों को बताता हूं कि हमारे सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) में कृषि और बागवानी, पर्यटन के साथ-साथ समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, तो वे आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि हमारा कृषि तंत्र कितना मजबूत है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र जैसे बागवानी, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन मिलकर एक बड़े आर्थिक नेटवर्क बनाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज छात्र एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं जहां उन्हें अपने भविष्य के करियर के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे।
सरकारी रोजगार की सीमाओं को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रों से स्पष्ट रूप से कहा कि हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। आप सभी जानते हैं कि अगर मैं खड़ा होकर कहूं कि आप सभी को सरकारी नौकरी मिल जाएगी, तो एक साल के भीतर ही मैं गलत साबित हो जाऊंगा। इस दौरान सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि क्योंकि सच्चाई यह है कि आप सभी को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। कुछ को मिलेगी, लेकिन बहुतों को नहीं। तो बाकी क्या करेंगे?
क्षेत्र की आर्थिक वास्तविकताओं को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला, लौह अयस्क या तेल जैसे संसाधनों से संपन्न क्षेत्रों के विपरीत, जम्मू और कश्मीर को अपनी मौजूदा ताकत के आधार पर उद्योग विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर हमारे पास अन्य क्षेत्रों की तरह जमीन के नीचे कोयला, लौह अयस्क या तेल होता, तो शायद हम यहां बड़े कारखाने स्थापित कर सकते थे। लेकिन हमारी वास्तविकता ऐसी नहीं है। हमें अपने पास मौजूद संसाधनों के आधार पर उद्योग विकसित करने होंगे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कृषि और उससे संबंधित गतिविधियां इस क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास का सबसे व्यवहार्य मार्ग प्रदान करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पारंपरिक कृषि पद्धतियां आजीविका बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती हैं और उन्होंने मूल्यवर्धन और आधुनिक कृषि उद्यमशीलता की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि एक समय था जब हमारे युवा पारंपरिक खेती से गहराई से जुड़े हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे उनका ध्यान इससे हट गया क्योंकि कृषि अनिश्चित दिखाई देने लगी। मौसम की गड़बड़ी, बाजारों तक पहुंचने में कठिनाई और अन्य चुनौतियों ने कई लोगों को हतोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी), जेकेसीआईपी और मिशन युवा जैसे कार्यक्रम कृषि को आधुनिक, मूल्यवर्धित और प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्र में बदलने के लिए तैयार किए गए हैं।
सीएम अब्दुल्ला ने आगे कहा कि हमारे पास जो जमीन है, वह सीमित ही रहेगी। वास्तव में, बीस-तीस साल पहले की तुलना में कृषि भूमि सिकुड़ रही है। तो सवाल यह है कि हम कृषि को कैसे टिकाऊ बनाए रखें? इसका उत्तर मूल्यवर्धन, नवाचार और उद्यमिता में निहित है। उत्पादन का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने जम्मू और कश्मीर में मूल्यवर्धन की अपार संभावनाओं पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर में हम अपने द्वारा उत्पादित दूध का केवल छह से सात प्रतिशत ही संसाधित करते हैं। इसकी तुलना गुजरात से करें, जहां लगभग 93 प्रतिशत दूध का प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन किया जाता है। जब आप दूध को पनीर, खोया या अन्य दुग्ध उत्पादों में बदलते हैं, तो इसका मूल्य कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने मांस उत्पादन, मत्स्य पालन, शहद, फल, सब्जियां और पुष्पकृषि जैसे क्षेत्रों में भी अवसरों की बात कही।
पुरस्कार विजेता युवा नवप्रवर्तकों में से एक का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमने जिस युवती को सम्मानित किया, उसने पाया कि हमारे क्षेत्र में फूलों की शेल्फ लाइफ केवल तीन दिन होती है। उसने बस बेहतर पैकेजिंग तकनीकों पर काम किया, और अब वही फूल पंद्रह दिनों तक ताजा रह सकते हैं। जम्मू मंदिरों का शहर है, और यहां फूलों की मांग हमेशा रहेगी। इस तरह एक छोटा सा नवाचार व्यापार का अवसर पैदा कर सकता है।
छात्रों को असफलता के भय के बिना उद्यमिता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि नवाचार में अक्सर जोखिम और बाधाएं शामिल होती हैं। उन्होंने कहा कि सफल होने के लिए सरकारी नौकरी होना जरूरी नहीं है। आपको बस इरादा, एक विचार और कुछ सार्थक करने का जुनून चाहिए। इसके बाद, हम, चाहे सरकार के रूप में हों या इस विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के रूप में, आपका समर्थन करने के लिए यहां मौजूद हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों को तो रात में सोते समय भी विचार आते हैं। आप एलोन मस्क जैसे उद्यमियों से प्रेरित हो सकते हैं। उनके अरबों डॉलर के रॉकेट कभी-कभी आसमान में फट जाते हैं, लेकिन वे इसे असफलता नहीं मानते। वे कहते हैं कि वे सफलता से जितना सीखते हैं, उतना ही विस्फोट से भी सीखते हैं।
युवाओं से भय पर काबू पाने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि असफलता से मत डरो। कोशिश न करने से डरो। अगर आप असफल होते हैं, तो हम आपको फिर से उठने में मदद करेंगे। कोशिश करो, नवाचार करो और आगे बढ़ो - हम आपकी सफलता में मदद करने के लिए यहां हैं। यह मेरा आप सभी से वादा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने चार प्रकाशनों का विमोचन किया और दो स्टार्टअप और दो किसान उत्पादक संगठनों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर कृषि सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से 808 नए किसान खिदमत घर भी शुरू किए।