ओडिशा राज्यसभा रण: नामांकन के आखिरी दिन मनमोहन सामल, सुजीत, दिलीप रे ने भरा पर्चा, जीत का भरोसा

मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और दिलीप रे ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन किया दाखिल


भुवनेश्वर, 5 मार्च। ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया।

नामांकन के समय ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव और प्रवति परिदा, भाजपा ओडिशा प्रभारी विजयपाल सिंह तोमर तथा सत्तारूढ़ दल के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

तीनों उम्मीदवारों ने गुरुवार को नामांकन की आखिरी तारीख पर रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपने नामांकन पत्र जमा किए।

नामांकन के बाद मनमोहन सामल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा इस चुनाव में ओडिशा के विकास और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर उतरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है और संसद में राज्य की मजबूत आवाज बनने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “हमें जीत का पूरा भरोसा है। हमारी प्राथमिकता ओडिशा के विकास से जुड़े मुद्दों को उठाना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर उसका हक और ध्यान मिले।”

सामल ने यह भी कहा कि पार्टी ओडिशा के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत से काम करती रहेगी। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे ‘सेक्युलरिज्म’ के मुद्दे और राजनीतिक अटकलों को भी खारिज करते हुए कहा कि भाजपा सकारात्मक राजनीति पर ध्यान दे रही है।

भाजपा अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे आसानी से राज्यसभा चुनाव जीतेंगे।

नामांकन के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और उद्योगपति दिलीप रे ने कहा, “मैं भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और मनमोहन सामल का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मुझे यह चुनाव लड़ने के लिए पूरा समर्थन दिया। मैंने आज नामांकन दाखिल किया है और कल से अपना चुनाव अभियान शुरू करूंगा। मुझे उम्मीद है कि 2002 की तरह इस बार भी मुझे समर्थन मिलेगा और मैं चुनाव जीतूंगा।”

मनमोहन सामल साल 2000 में राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे, जबकि वरिष्ठ नेता दिलीप रे 1996 से 2002 तक राज्यसभा में रहे और 2002 में फिर से चुने गए थे। उस समय उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को बड़ा राजनीतिक झटका दिया था, क्योंकि उस चुनाव में बीजेडी के कई विधायकों ने कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग की थी।

वहीं, वरिष्ठ नेता सुजीत कुमार, जिनका कार्यकाल इस साल अप्रैल में खत्म हो रहा है, उन्हें सत्तारूढ़ भाजपा ने फिर से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।

सुजीत कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आभारी हूं, जिन्होंने एक बार फिर मुझ पर भरोसा जताया। मैं अपने माता-पिता के आशीर्वाद और उन सभी लोगों का भी दिल से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मेरी पूरी यात्रा में मेरा साथ दिया और मार्गदर्शन किया।”
 

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