गुजरात: सीएम भूपेंद्र पटेल ने 'भविष्य के शहरों' पर किताब का विमोचन किया, जलवायु जोखिम से हरित अवसरों की राह दिखाई

गुजरात: सीएम भूपेंद्र पटेल ने 'शेपिंग टुमॉरोज सिटीज-फ्रॉम क्लाइमेट रिस्क टू ग्रीन अपॉर्चुनिटीज' किताब का किया विमोचन


गांधीनगर, 5 मार्च। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में 'शेपिंग टुमॉरोज सिटीज-फ्रॉम क्लाइमेट रिस्क टू ग्रीन अपॉर्चुनिटीज' किताब का विमोचन किया। आज के समय की बदलती दुनिया में अर्बनाइजेशन सबसे ज्यादा बदलाव लाने वाला प्रोसेस है। यह किताब इसे एक समस्या नहीं, बल्कि सस्टेनेबल, क्लाइमेट रेजिलिएंट और इनोवेटिव शहरों के तौर पर डेवलप करने के मौकों के बारे में विस्तार से बताती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहरीकरण की चुनौतियों को मौकों में बदलने के गाइडेंस को गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर शालिनी अग्रवाल ने इस किताब में सही तरीके से बताया है, जिसमें दुनिया के देशों के अर्बन डेवलपमेंट और शहरीकरण के हिसाब से भविष्य के अर्बन डेवलपमेंट का विजन है।

बढ़ते शहरीकरण की वजह से आने वाले दिनों में पर्यावरण और सामाजिक चुनौतियों के लिए खास एडवांस प्लानिंग और पॉलिसी बनाने की अहमियत को इस किताब में शामिल किया गया है। इतना ही नहीं, शहरीकरण से होने वाले क्लाइमेट चेंज के असर, एनर्जी की मांग, रिसोर्स की खपत और ग्रीनहाउस गैस एमिशन को हल करने के आइडिया को भी इस किताब में शामिल किया गया है।

भारत में भी शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और 2047 तक इसके काफी बढ़ने की संभावना है। इस आर्थिक विकास के सफर में शहरों की भूमिका बहुत अहम होने वाली है। बढ़ते शहरीकरण की वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर, घर, पानी और बेसिक सेवाओं पर जोर बढ़ता है, इसलिए शहरों की अच्छी तरह से ऑर्गनाइज्ड प्लानिंग और सस्टेनेबल डेवलपमेंट बहुत जरूरी है। इस किताब में यह समझाया गया है।

सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग चैनल दिखाने वाली यह किताब बताती है कि क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए ग्रीन बॉन्ड, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, कार्बन मार्केट और क्लाइमेट फाइनेंस जैसी कोशिशों से बड़े इन्वेस्टमेंट हासिल किए जा सकते हैं। इन टूल्स के जरिए शहर जरूरी कैपिटल जुटा सकते हैं। इसके साथ ही, लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट संस्थाओं की फाइनेंशियल क्षमता को मजबूत करने और म्युनिसिपल फाइनेंस सिस्टम को मजबूत करने पर भी बात की गई है।

शहर समस्याओं की वजह नहीं हैं, बल्कि वे ऐसे प्लेटफॉर्म हैं, जहां सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है। यह किताब इस बारे में भी बताती है कि सही प्लानिंग, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल पॉलिसी के जरिए शहरों को विकास का केंद्र और ग्रीन भविष्य का आधार कैसे बनाया जा सकता है।
 

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