पलक्कड़ में असंतुष्टों की बैठक: CPI-M का कड़ा प्रहार, पूर्व विधायक पीके सासी पार्टी से निष्कासित

पलक्कड़ में असंतुष्टों की बैठक के बाद सीपीआई-एम ने पूर्व विधायक पीके सासी को किया निष्कासित


तिरुवनंतपुरम, 5 मार्च। केरल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट (सीपीआई-एम) ने गुरुवार को पूर्व विधायक पीके सासी को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

सासी पलक्कड़ क्षेत्र से पूर्व विधायक रहे हैं। 2021 विधानसभा चुनाव में दूसरा मौकानाही मिलने से उनके पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद थे। उन्हें चुनावी मैदान से बाहर करने के फैसले ने उनके समर्थकों में असंतोष पैदा कर दिया था और तब से उनका राज्य नेतृत्व के साथ संबंध तनावपूर्ण बने हुए थे।

हालांकि बाद में पार्टी ने उन्हें केरल टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का अध्यक्ष नियुक्त करके मनाने की कोशिश की थी, लेकिन सासी ने पिछले महीने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि पार्टी से पूरी तरह से अलग होने की संभावना है।

यह निष्कासन उस घटना के तुरंत बाद हुआ, जब पीके सासी ने गुरुवार को अपने गृह नगर पलक्कड़ जिले में असंतुष्ट सीपीआई-एम कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन में भाग लिया था। इस बैठक में पार्टी के कई असंतुष्ट सदस्य शामिल हुए, जिसमें पीके सासी ने जिला नेतृत्व की कड़ी आलोचना की।

सम्मेलन के एक घंटे के अंदर ही राज्य नेतृत्व ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से उनके निष्कासन की घोषणा कर दी।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व ने असंतुष्टों की सभा में उनकी भागीदारी और संगठन के खिलाफ की गई आलोचना को पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना है।

पीके सासी ने इससे पहले इस सभा को आत्मसम्मानित क्रांतिकारियों की बैठक बताया था और कहा था कि यह विवश परिस्थितियों में आयोजित की गई थी।

इस बीच, विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि स्वयं सीपीआई-एम ने कुछ साल पहले सामने आए नैतिक पतन के आरोपों के संबंध में पूर्व विधायक पीके सासी को क्लीन चिट दे दी थी।

इस घटनाक्रम से पलक्कड़ जिले में राजनीतिक उथल-पुथल और बढ़ गई है, जहां पार्टी की मजबूत संगठनात्मक संरचना के बावजूद सीपीआई-एम के भीतर आंतरिक असहमति समय-समय पर सामने आती रही है।

पलक्कड़ जिसमें 12 विधानसभा क्षेत्र हैं, सीपीआई-एम का मजबूत गढ़ रहा है और 2021 के चुनावों में इसने 10 सीटें जीती थीं, हालांकि दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में इसे करारी हार का सामना करना पड़ा और असंतुष्टों का समूह बढ़ता जा रहा है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों में स्थिति कैसी रहेगी, यह देखना बाकी है।
 
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