पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली: 6 साल में बेतहाशा बढ़ी गरीबी और असमानता, रिपोर्ट ने किए भयावह खुलासे

छह साल में बढ़ी गरीबी और असमानता, पाकिस्तान योजना आयोग की रिपोर्ट में खुलासा


नई दिल्ली, 4 मार्च। पाकिस्तान के योजना आयोग द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पिछले छह वर्षों के दौरान पाकिस्तान में असमानता और गरीबी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यह निष्कर्ष पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा कराए गए 2018-19 और 2024-25 के हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (एचआईएस) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें घरेलू आय के स्तर और उसके वितरण की तुलनात्मक समीक्षा की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी दर 2018-19 में 21.9 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई।

कराची से प्रकाशित बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबी में यह उछाल बेरोजगारी में वृद्धि, आय असमानता के विस्तार और परिवारों की वास्तविक आय में गिरावट का परिणाम है।

योजना आयोग के विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि बेरोजगारी दर 2020-21 में 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 7.1 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में परिवारों की औसत वास्तविक आय में 27.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति और जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आर्थिक नीतियों में अस्थिरता और गैर-जिम्मेदार निर्णयों ने इस स्थिति को और गंभीर बनाया है।

रिपोर्ट में गरीबी और असमानता में वृद्धि के अन्य प्रमुख कारणों का भी उल्लेख किया गया है। 2019-20 में कोविड-19 महामारी और 2022-23 में आई विनाशकारी बाढ़ ने अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाया।

इसके अतिरिक्त, अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यक्रमों के तहत सब्सिडी में कटौती, अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि और विकास व्यय में भारी कमी की गई, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।

रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए योजना मंत्री ने निर्यात-आधारित विकास मॉडल अपनाने, अपेक्षाकृत कम विकसित जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने और संघीय तथा प्रांतीय सरकारों के बीच बेहतर वित्तीय संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की वकालत की, जिसमें नकद हस्तांतरण योजनाएं, लक्षित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को प्रोत्साहन देना शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में जीवन स्तर में आई व्यापक गिरावट का गंभीर संकेत है।

साथ ही, इसमें असमानता कम करने और गरीबी उन्मूलन के लिए एक समग्र और संतुलित विकास रणनीति के विभिन्न घटकों का सुझाव भी दिया गया है। बिजनेस रिकॉर्डर के लेख में उम्मीद जताई गई है कि मौजूदा सरकार इन सिफारिशों को लागू कर आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
 

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