दिल्ली: अवैध टेंट हटाने गए सरकारी कर्मचारियों से 'आप' की गुंडागर्दी, पूर्व विधायक पति पर मारपीट का आरोप, FIR

अवैध टेंट के व‍िवाद में सरकारी कर्मचारियों से मारपीट, 'आप' के सदस्‍यों पर आरोप, एफआईआर दर्ज


नई दिल्ली, 3 मार्च। दिल्ली के शालीमार बाग सीए ब्लॉक स्‍थित एक सार्वजनिक पार्क में अवैध रूप से टेंट लगाने को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं की दबंगई का एक मामला सामने आया है। शालीमार बाग विधानसभा से आम आदमी पार्टी की पूर्व विधायक वंदना कुमारी के पति और उनके साथियों पर नगर निगम (एमसीडी) के कर्मचारियों के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं।

नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विभाग में चौधरी के पद पर तैनात पीड़ित रजनीश कुमार की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, यह घटना 2 मार्च 2026 की है। रजनीश कुमार ने बताया कि सीए ब्लॉक पार्क में बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से एक विशाल टेंट लगाया जा रहा था। उन्होंने और उनके साथी कर्मचारियों ने इसकी अनुमति के बारे में पूछा तो उनसे गाली-गलौज की गई।

पीड़ित का आरोप है कि इस अवैध कब्जे के पीछे पूर्व विधायक वंदना कुमारी के पति और उनकी टीम सक्रिय थी। जब सरकारी कर्मचारियों ने नियम अनुसार टेंट हटाने की कोशिश की, तो आरोपी भड़क गए। उन्होंने कानून को हाथ में लेते हुए कर्मचारियों पर हमला बोल दिया। पीड़ित रजनीश और उनके साथी विपुल पर जानलेवा हमला किया गया।

आम आदमी पार्टी के नेताओं की बढ़ती अराजकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। एक तरफ जहां पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार ईमानदारी के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ उनके पूर्व विधायक के परिजन ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारियों को अपना शिकार बना रहे हैं।

इस घटना पर स्थानीय पार्षद अनिता जैन ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि शालीमार बाग के सीए ब्लॉक पार्क में जो हुआ, वह केवल एक विवाद नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी की गुंडागर्दी है। पूर्व विधायक वंदना कुमारी के पति सज्जन कुमार आदतन अपराधी हैं, जिनके खिलाफ क्षेत्र में मारपीट, गाली-गलौज और लोगों को धमकाने के मामले पहले भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो चुके हैं।

उन्होंने आगे कहा कि एक सरकारी कर्मचारी जब अपनी ड्यूटी करते हुए सार्वजनिक संपत्ति को अवैध कब्जे से बचाने की कोशिश करता है, तो उस पर जानलेवा हमला करना और धमकियां देना दर्शाता है कि इन लोगों में कानून का कोई भय नहीं रह गया है। सत्ता के अहंकार में डूबे ये लोग अब खुद को संविधान से ऊपर समझने लगे हैं।

उन्‍होंने कहा कि क्या सार्वजनिक पार्कों पर अवैध कब्जा करना नई राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है। इस संदर्भ में स्पष्ट मांग की जा रही है कि बीएनएस की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की जाए। यह भी अपेक्षा की जा रही है कि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव न डाला जाए तथा ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। संबंधित राजनीतिक दल से भी अपेक्षा है कि वह इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख जनता के सामने रखे और पीड़ित से माफी मांगे।
 

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