मध्य-पूर्व से फंसे भारतीयों को निकालने नौसेना का युद्धपोत ओमान की खाड़ी में तैनात, हर चुनौती को तैयार

ओमान की खाड़ी के पास नौसेना का युद्धपोत तैनात, जरूरत पड़ने पर मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए होगा इस्तेमाल


नई दिल्ली, 3 मार्च। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भीषण संघर्ष लगातार जारी है। इस युद्ध के चलते मध्य-पूर्व क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ-साथ समुद्री व्यापार पर भी बड़ा प्रभाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के स्थगित होने से बड़ी संख्या में भारतीय यात्री भी उस इलाके में फंसे हुए हैं। भारत सरकार ने उनकी सुविधा के लिए विशेष उड़ानों का संचालन शुरू किया है। वहीं, लंबे समय से तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी जरूरत पड़ने पर काम आ सकते हैं। भारतीय युद्धपोत पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

नौसेना के ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ के तहत इस क्षेत्र में वर्ष 2017 से दो बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं—एक ओमान की खाड़ी के पास ‘ऑपरेशन संकल्प’ और दूसरा अदन की खाड़ी में ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’। इन दोनों अभियानों के तहत भारतीय नौसेना के एक-एक युद्धपोत ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के पास तैनात रहते हैं। फिलहाल, ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस सूरत तैनात है। सूत्रों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर यह युद्धपोत राहत और बचाव कार्यों को अंजाम दे सकता है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर अदन की खाड़ी से भारतीय नौसेना के अन्य युद्धपोतों को भी कम समय में मूव किया जा सकता है।

आईएनएस सूरत एक गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना किसी भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। यह सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है। इसमें सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम लगा है और 16-16 मिसाइलों के दो वर्टिकल लॉन्चर के जरिए कुल 32 मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल दागी जा सकती हैं।

इसके अलावा एंटी-सर्फेस वॉरफेयर के लिए ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम भी लगा हुआ है, जिससे 16 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसमें आधुनिक सर्विलांस रडार लगा है और दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए रॉकेट लॉन्चर और टॉरपीडो लॉन्चर भी मौजूद हैं। इस जहाज की लंबाई 163 मीटर है और इसका वजन लगभग 7,400 टन है। यह डेस्ट्रॉयर चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों से संचालित होता है और इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 30 नॉटिकल मील प्रति घंटा है।

खाड़ी देशों में राहत और बचाव अभियानों का भारतीय नौसेना का एक लंबा इतिहास रहा है। पिछले कुछ वर्षों में नौसेना ने कई महत्वपूर्ण राहत अभियानों में भाग लिया है। भारत सरकार के आदेश पर हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया।

वर्ष 2023 में ‘ऑपरेशन कावेरी’ चलाया गया, जिसमें सूडान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने में नौसेना ने अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ के तहत खाड़ी देशों के साथ-साथ मालदीव और श्रीलंका से भारतीयों की सुरक्षित निकासी की गई। वर्ष 2015 में ‘ऑपरेशन राहत’ के तहत यमन संकट में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। इससे पहले वर्ष 2011 में ‘ऑपरेशन सेफ होमकमिंग’ के तहत लीबिया से और वर्ष 2006 में ‘ऑपरेशन सुकून’ के तहत लेबनान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी कराई गई थी।

भारतीय नौसेना ने वर्ष 2017 में ‘मिशन डेप्लॉयमेंट’ की शुरुआत की। फिलहाल, दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना के कुल छह युद्धपोत लगातार तैनात रहते हैं।

पहली तैनाती अरब सागर में स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास है, जहां से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के रास्ते भारत का लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार होता है। दूसरी तैनाती अदन की खाड़ी में है, जहां ऊर्जा व्यापार के अलावा लगभग 90 प्रतिशत अन्य व्यापार होता है, जो स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी से होकर अरब सागर के रास्ते भारत पहुंचता है। यह क्षेत्र समुद्री डकैती के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। जिबूती और सोमालिया के समुद्री लुटेरे इसी इलाके में सक्रिय रहते हैं। यह व्यापार का सबसे छोटा मार्ग है, इसलिए यहां यातायात भी अधिक रहता है।

यदि अदन की खाड़ी का मार्ग बाधित हो जाए तो व्यापारी जहाजों को भूमध्य सागर से होते हुए अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते आना-जाना पड़ता है। यह मार्ग न केवल समय बढ़ाता है, बल्कि लागत भी बढ़ा देता है।

तीसरी तैनाती सेशेल्स के पास है, जो केप ऑफ गुड होप मार्ग से आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने के लिए है। चौथी तैनाती मालदीव के पास, पांचवीं अंडमान-निकोबार के पास और छठी तैनाती म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास बंगाल की खाड़ी में है।

इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ युद्धाभ्यास भी करते हैं और किसी भी प्रकार की समुद्री डकैती या दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देते हैं।
 

Similar threads

Trending Content

Forum statistics

Threads
12,610
Messages
12,647
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top