मथुरा-वृंदावन में होली का उल्लास चरम पर, कुंज गलियों में उमड़े भक्त, राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में डूबे श्रद्धालु

मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में होली का उल्लास, प्रेम भरी होली खेलने के लिए पहुंच रहे भक्त


मथुरा, 3 मार्च। होली का असली आनंद मथुरा और वृंदावन में आता है, जहां भक्त आध्यत्मिक रंग में रंगकर होली का पर्व मनाते हैं।

25 फरवरी से ही मथुरा और वृंदावन में होली का आगाज हो चुका है, लेकिन 4 मार्च से पहले मथुरा-वृंदावन में भक्तों की भारी भीड़ होली खेलने के लिए पहुंच रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोगों को वृंदावन में होली का आनंद लेते हुए देखा जा रहा है।

मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में होली का अलग रूप देखने को मिलता है, और यही कारण है कि लोग मथुरा-वृंदावन की होली का आनंद लेने और वहां की रज को माथे से लगाने के लिए आते हैं। होली का आनंद लेने इटावा से पहुंचे श्रद्धालु ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मथुरा की होली के बारे में जितना सुना था, उससे कहीं ज्यादा आनंद से भरा महसूस कर रहे हैं। यहां की होली में एक मिठास है, जो राधा रानी और भगवान श्री कृष्ण से जोड़ती है। यहां की होली की मिठास का आनंद लेने के लिए ही हम परिवार के साथ पहुंचे हैं।"

दिल्ली से आए राघव ने बताया कि वे हर साल होली का आनंद लेने के लिए वृंदावन आते हैं। उन्होंने कहा, "भले ही लोग सूतक और ग्रहण के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन इन चीजों से हमें फर्क नहीं पड़ता। हम आते हैं और भगवान की कृपा से हर बार अच्छे दर्शन होते हैं। दर्शन के बाद लगता है कि आज कुछ अच्छा काम किया है। मन को बहुत शांति मिलती है।" वहीं, अन्य श्रद्धालु ने कहा, "वो 6 साल से हर होली वृंदावन में ही मनाते हैं क्योंकि ऐसे प्रेम भरी होली देश के किसी और हिस्से में नहीं होती।" मथुरा और वृंदावन के अलावा, कोलकाता के इस्कॉन मंदिर में भी भक्तों ने प्रेम के साथ राधा नाम जपते हुए होली खेली।

इस्कॉन मंदिर के उपाध्यक्ष राधारमन प्रभु का कहना है, "चैतन्य महाप्रभु प्रेम का संदेश फैलाने आए थे। उनका जन्म 1486 में नबद्वीप में हुआ था। उनका जन्म होली के दिन हुआ था, जिसे उस समय लोग मना रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि उस दिन चंद्र ग्रहण भी था और आज भी वही दिन है।
 

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