राजौरी की बॉर्डर पंचायतों में 'किसान खिदमत घर': सरकारी सेवाएं अब दहलीज पर, दूर जाने की झंझट खत्म

राजौरी बॉर्डर पंचायतों में किसान खिदमत घर, अब सरकारी कामों के लिए नहीं जाना पड़ता दूर


राजौरी, 3 मार्च। केंद्र सरकार ने राजौरी की बॉर्डर पंचायतों में किसान खिदमत घर और सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) बनाए हैं। इसका मकसद यह है कि अब गांव के लोगों को अपने जरूरी ऑनलाइन काम और सरकारी सर्विसेज के लिए दूर-दूर न जाना पड़े। ये सेंटर दो-दो पंचायतों को मिलाकर खोले गए हैं ताकि लोग आसानी से अपने घर के पास ही सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकें।

वीएलई और किसान खिदमत घर के ऑपरेटर अनीस कसाना ने बताया कि सरकार ने चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर की गाइडेंस में एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की मदद से इन सेंटरों की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि ये सेंटर किसानों और ग्रामीण युवाओं दोनों के लिए बहुत उपयोगी हैं। किसान खिदमत घर और सीएससी सेंटर के जरिए किसान अपने खेत संबंधी काम और दस्तावेज आसानी से ऑनलाइन कर सकते हैं। वहीं, बेरोजगार युवा भी सरकारी सेवाओं के माध्यम से घर बैठे कमाई कर सकते हैं।

अनीस कसाना कहते हैं कि यह पहल न सिर्फ किसानों की जिंदगी आसान बनाएगी, बल्कि पूरे इलाके में डिजिटल और सरकारी सेवाओं की पहुंच भी बढ़ाएगी।

एक किसान ने बताया कि पहले बॉर्डर इलाके में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी मुश्किलें थीं। कोई भी काम करवाने के लिए उन्हें मेन रोड तक लगभग छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। सरकारी काम या पेंशन जैसी चीजों के लिए उन्हें राजौरी तक जाना पड़ता था, जो समय और मेहनत दोनों में बहुत भारी पड़ता था। लेकिन अब, किसान खिदमत घर और सीएससी सेंटर के होने से यह सारी परेशानी खत्म हो गई है। लोग अपने घर के पास ही दस्तावेज ऑनलाइन करवा सकते हैं और सरकारी काम आसानी से निपटा सकते हैं।

विशेष रूप से बुज़ुर्ग लोगों को इसका बहुत फायदा हुआ है। अब उन्हें दूर जाने की जरूरत नहीं है और उनका समय और मेहनत दोनों बच गए हैं। पेंशन, सरकारी योजनाओं और अन्य लाभकारी सेवाओं का लाभ वे आसानी से ले सकते हैं।
 

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