अर्धचंद्र और मोती बिंदी से सजा महाकाल का शांत रूप, दर्शन कर हजारों भक्त हुए भावविभोर

माथे पर अर्धचंद्र सजाए बाबा महाकाल ने भक्तों को दिए दर्शन, अद्भुत शृंगार देख भावविभोर हुए श्रद्धालु


उज्जैन, 2 मार्च। फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आज सोमवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।

इस दौरान भक्तों ने देर रात से ही लाइन में लगकर अपने ईष्ट देव बाबा महाकाल के दर्शन किए। बाबा के अद्भुत दर्शन के बाद पूरा मंदिर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।

वार सोमवार और तिथि चतुर्दशी के दिन भक्तों को बाबा के अद्भुत शृंगार दर्शन का सौभाग्य मिला। आज बाबा महाकाल भी भक्तों को दर्शन देने के लिए सुबह 4 बजे जागे। वीरभद्र से आज्ञा लेकर सबसे पहले मंदिर के कपाट खोले गए और फिर पंचामृत और फलों के रस से बाबा का अभिषेक किया गया, जिसके बाद भस्म रमाकर आकर्षक शृंगार किया गया। बाबा का आज का शृंगार मन को शांति प्रदान करने वाला है क्योंंकि बाबा के माथे पर अर्ध चांद और मोती की बिंदी को स्थापित किया गया, जोकि शांति का प्रतीक है।माथे पर त्रिपुंड लगाए बाबा को भांग और सूखे मेवों से भी सुसज्जित किया गया। भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गुंजायमान हो गया।

बता दें कि रोजाना नियमित समय पर बाबा की भस्म आरती होती है, जिसमें पहले बाबा निराकार और फिर साकार रूप में भक्तों को दर्शन करते हैं। माना जाता है कि निराकार रूप के दर्शन करना सौभाग्य की बात होती है, क्योंकि ये जन्म और मृत्यु के फेर से मुक्ति दिलाता है और जीवन के असली मायनों को समझाता है। वहीं साकार रूप में बाबा सजधज कर भक्तों को दर्शन देते हैं।

हर तिथि के अनुसार बाबा का अद्भुत शृंगार किया जाता है और हर शृंगार अलग और मंत्रमुग्ध करने वाला होता है। कुछ खास त्योहारों जैसे होली, दिवाली, महाशिवरात्रि और अन्य सनातनी त्योहारों पर बाबा का भव्य शृंगार होता है और सुबह से लेकर शाम तक बाबा की 6 आरतियां होती हैं, जिसमें भोग आरती भी शामिल होती है। बाबा को रोजाना अलग-अलग मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं और वही मिष्ठान बाद में भक्तों में वितरण कर दिया जाता है।
 

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