नई दिल्ली, 1 मार्च। भारतीय सेना अपने अचूक, अभेद्य और घातक वार के लिए जानी जाती है। हालांकि, दुनिया ने रविवार को भारतीय सेना का एक दूसरा रूप भी देखा। दरअसल, सेना ने मानवीय सहायता और आपदा राहत के कार्यों में अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित की। दुनिया के 25 देशों से आए 28 रक्षा पत्रकार आगरा में भारतीय सेना की इस खास यूनिट व उसके कार्यों को देखने पहुंचे। सेना की यह यूनिट मानवतावादी सहायता और आपदा राहत यानी एचएडीआर कामों में विशेषज्ञ मानी जाती है।
आसान शब्दों में कहें तो जब कहीं भूकंप, बाढ़, चक्रवात या दूसरी बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है तो सेना की यह यूनिट सबसे पहले मदद के लिए तैयार रहती है। यहां विश्व के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों को दिखाया गया कि भारतीय सेना कितनी तेजी से आपदा वाले इलाकों में पर पहुंचने की तैयारी रखती है।
उन्हें बताया गया कि जैसे ही कहीं आपदा की सूचना मिलती है, तय योजना के अनुसार तुरंत टीमों को सक्रिय किया जाता है। कौन सी टीम जाएगी, क्या-क्या सामान ले जाया जाएगा, कितने समय में रवाना होना है, यह सारी योजना व कार्यक्रम सब कुछ पहले से तय रहता है।
सेना के अधिकारियों ने समझाया कि नागरिक प्रशासन और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की सरकारों के साथ भी मिलकर मानवीय सहायता के लिए आपदाग्रस्त क्षेत्र में काम किया जाता है। खास एचएडीआर कार्यबल को इस तरह तैयार किया गया है कि वह तुरंत चिकित्सा सहायता, खाने-पीने का इंतजाम और जरूरी सामान प्रभावित लोगों तक पहुंचा सके। इस दौरान यहां मानवीय सहायता के लिए तैयार किए गए सेना के आधुनिक बचाव उपकरण भी दिखाए गए। पानी में चलने वाली हल्की बोट व अन्य साधन, बाढ़ राहत के उपकरण व जल्दी से जोड़े जाने वाले अस्थायी पुल।
इसके अलावा, सेना ऐसी मेडिकल किट भी तैयार रखती है जो कठिन हालात में एक साथ कई घायलों का इलाज कर सके। यह किट भी यहां दिखाई गई। इन सबका प्रदर्शन किया गया। सेना ने बताया कि इन संसाधनों की मदद से दूर-दराज और मुश्किल इलाकों में भी तेजी से राहत पहुंचाई जाती है।
पूरे कार्यक्रम का मकसद यह दिखाना था कि भारतीय सेना सिर्फ युद्ध के लिए ही तैयार नहीं रहती, बल्कि आपदा के समय आम लोगों की जान बचाने में भी उतनी ही गंभीर और सक्षम है। इस मुलाकात से अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को यह समझने का मौका मिला कि भारत संकट की घड़ी में तुरंत, संगठित और मानवीय तरीके से मदद पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार रहता है।