उत्तर प्रदेश: घर बैठे आमजन एफआईआर समेत 27 सुविधाओं का उठा रहे लाभ

उत्तर प्रदेश: घर बैठे आमजन एफआईआर समेत 27 सुविधाओं का उठा रहे लाभ


लखनऊ, 11 जनवरी। सरकार की यूपी पुलिस का यूपीकॉप एप और सिटीजन पोर्टल आज प्रदेशवासियों के लिए “डिजिटल पुलिस स्टेशन” की तरह काम कर रहा है। प्रदेशवासी एप के माध्यम से न सिर्फ घर बैठे एफआईआर दर्ज करा रहे हैं बल्कि 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ बिना थाने गए उठा रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए टेक्नोलॉजी से जोड़ा है। उनकी दूरदर्शी सोच का नतीजा है कि आज यूपी पुलिस तकनीक के जरिये आम जनमानस की सेवा में नई मिसाल कायम कर रही है।

उन्‍होंने कहा कि यूपीकॉप ऐप ने थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। वहीं, ऐप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण की समयावधि में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

डीजीपी ने बताया कि एप के जरिए लोग ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने, एफआईआर की कॉपी डाउनलोड करने, खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज कराने, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन, कर्मचारी सत्यापन समेत 27 प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। अब तक 50 लाख से अधिक यूजर्स एप को डाउनलोड कर चुके हैं। वहीं एप के माध्यम से 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर डाउनलोड की जा चुकी हैं जबकि 7.3 लाख से अधिक लोगों ने खोये सामान की रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह आंकड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल पुलिसिंग की सोच के महत्व को दर्शाते हैं।

डीजीपी ने बताया कि यूपीकॉप एप में कई आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसमें रीयल-टाइम नोटिफिकेशन के जरिए आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति की तुरंत जानकारी मिल रही है। यह एप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से इसका उपयोग कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिहाज से लोकेशन ट्रैकिंग और एसओएस बटन जैसी सुविधाओं को भी अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा, ऐप पर नजदीकी पुलिस स्टेशन को मैप पर देखने की सुविधा भी दी गई है, जो आपात स्थिति में काफी उपयोगी साबित हो रही है। ऐप से विभिन्न सेवाओं के निस्तारण में लगने वाले समय में भारी कमी आई है।

उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में चरित्र सत्यापन में लगभग 6 दिन का समय लग रहा है जबकि पहले इसमें 8 दिन लगते थे। इस तरह किरायेदार सत्यापन में करीब 8 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 24 से 25 दिन लगते थे, और कर्मचारी सत्यापन में करीब 5 दिन लग रहे हैं जबकि पहले 13 दिन लगते थे। इसके साथ ही योगी सरकार का पब्लिक ग्रेवांस रिव्यू पोर्टल भी आमजन के लिए प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।

डीजीपी ने कहा कि पोर्टल के जरिए आमजन अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिनकी नियमित समीक्षा और समयबद्ध निस्तारण भी किया जा रहा है। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ी है और शिकायतकर्ताओं को यह भरोसा मिला है कि उनकी बात सुनी जा रही है। उन्‍होंने बताया कि यूपीकॉप ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘डिजिटल पुलिस स्टेशन’ है, जो नागरिकों की शिकायतों और सेवाओं के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था देता है।

उन्‍होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम सेवा-प्रक्रियाओं का मानकीकरण कर रहे हैं ताकि हर आवेदन पर समान गति, समान पारदर्शिता और निश्चित समय-सीमा सुनिश्चित हो। टेक्नोलॉजी-आधारित जनशिकायत निवारण से पुलिसिंग अधिक जनकेंद्रित और जवाबदेह बन रही है—यही स्मार्ट पुलिसिंग का वास्तविक अर्थ है।
 

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