ब्रोंकियल अस्थमा: जानिए सांसों की तकलीफ से राहत पाने के आयुर्वेदिक उपाय

ब्रोंकियल अस्थमा: जानिए सांसों की तकलीफ से राहत पाने के आयुर्वेदिक उपाय


नई दिल्ली, 1 मार्च। ब्रोंकियल अस्थमा (दमा) एक ऐसी समस्या है जिसमें सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेते समय घरघराहट जैसी परेशानी महसूस होती है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे सांस अटक रही हो। मौसम बदलने पर, ठंडी हवा लगने से, धूल-मिट्टी, परागकण या किसी एलर्जी वाली चीज के संपर्क में आने से यह समस्या बढ़ सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार अस्थमा मुख्य रूप से कफ और वात दोष के असंतुलन से जुड़ा होता है, जिससे श्वास नलिकाओं में सूजन और बलगम बढ़ जाता है। हालांकि सही दिनचर्या, खान-पान और कुछ आसान आयुर्वेदिक उपायों से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

सबसे पहले खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। अस्थमा के मरीजों को रात में हल्का और गर्म भोजन लेना चाहिए। ठंडी, बासी या बहुत भारी चीजें जैसे दही, केला, तली-भुनी चीजें, ज्यादा खट्टी चीजें और ठंडे पेय से परहेज करना बेहतर माना जाता है क्योंकि ये कफ बढ़ा सकती हैं। गर्म सूप, अदरक वाला पानी, हल्दी वाला दूध और गुनगुना पानी फायदेमंद रहता है। दिनभर थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीना भी श्वास नलिकाओं को साफ रखने में मदद करता है।

कुछ घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे भी राहत दे सकते हैं। जैसे बहेड़ा का 3 से 5 ग्राम चूर्ण बराबर मात्रा में शहद के साथ दिन में दो बार लेना लाभकारी माना जाता है। इसी तरह कंटकारी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ या काढ़े के रूप में लिया जा सकता है। ये दोनों जड़ी-बूटियां कफ कम करने और श्वास मार्ग को साफ करने में सहायक मानी जाती हैं। छाती और पीठ पर गुनगुना सरसों का तेल, जिसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिला हो, हल्के हाथ से लगाने से भी जकड़न में राहत मिल सकती है। भाप लेना और गुनगुने पानी से गरारे करना भी काफी आराम देता है।

इसके अलावा, अस्थमा के मरीजों को धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, चाहे खुद का हो या किसी और का धुआं। धूल-मिट्टी और एलर्जी पैदा करने वाली चीजों से जितना हो सके बचें। घर को साफ और हवादार रखें। तनाव भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है, इसलिए मन को शांत रखना जरूरी है।

इसके साथ ही, नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाते रहें और अगर अचानक सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। आयुर्वेदिक उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह के साथ अपनाना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
 

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