कर्नाटक में 593 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड जीएसटी प्रैक्टिशनर गिरफ्तार

कर्नाटक में 593 करोड़ रुपये का फर्जी इनवॉइस घोटाला उजागर, जीएसटी प्रैक्टिशनर गिरफ्तार


बेंगलुरु, 28 फरवरी। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की बेलगावी जोनल यूनिट ने लगभग 593 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े बड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कथित मास्टरमाइंड को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है।

अधिकारिक बयान के अनुसार, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की जांच में सामने आया कि पंजीकृत जीएसटी प्रैक्टिशनर मोहम्मद सैफुल्लाह इस रैकेट का मुख्य आरोपी है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, सैफुल्लाह कई फर्जी और शेल जीएसटीआईएन का संचालन कर रहा था। वह इन संस्थाओं के जरिए बिना वास्तविक माल या सेवा आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जारी करता था और इनवॉइस की राशि के आधार पर कमीशन वसूलता था।

अधिकारियों ने बताया कि ठोस साक्ष्य सामने रखने पर आरोपी ने अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। उसे 24 फरवरी को बेंगलुरु में सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के बाद उसे बेंगलुरु स्थित विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जहां से बेलगावी ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मंजूर किया गया। बाद में बेलगावी की अदालत में पेश कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

यह कार्रवाई एक संदिग्ध जीएसटी पंजीकरण की जांच के दौरान शुरू हुई, जिसके बाद अधिकारियों ने बेंगलुरु में ‘स्टार टैक्स कंसल्टेंट’ से जुड़े परिसरों पर कई छापेमारी की।

छापों में एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो बिना किसी वास्तविक लेनदेन के फर्जी बिल जारी कर रहा था। इसके जरिए करीब 235 करोड़ रुपये का गलत तरीके से आईटीसी का लाभ उठाया गया और स्थानांतरित किया गया।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कई जीएसटी पंजीकरण केवल फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल बनाने के उद्देश्य से बनाए गए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर लाभार्थियों ने गलत तरीके से आईटीसी का दावा किया।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर शेल कंपनियों के माध्यम से लेनदेन का रिकॉर्ड रखता था, जबकि इन संस्थाओं की कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी।

जांच एजेंसियों ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य लाभार्थियों की पहचान तथा घोटाले की पूरी परिधि का पता लगाया जा रहा है।
 

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