उपराष्ट्रपति का आह्वान: भारत बने 'क्रिएटर नेशन', सेंट बर्चमैन्स कॉलेज के शताब्दी समारोह में तकनीक पर दिया जोर

'भारत को क्रिएटर नेशन बनना चाहिए'; उपराष्ट्रपति ने सेंट बर्चमैन्स कॉलेज शताब्दी समापन में टेक्नोलॉजी पर जोर दिया


नई दिल्ली, 28 फरवरी। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को केरल के चंगनास्सेरी में सेंट बर्चमैन्स कॉलेज के शताब्दी समारोह के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह कार्यक्रम 28 फरवरी 2026 को अर्चबिशप कावुकट्टू हॉल में आयोजित हुआ, जहां उपराष्ट्रपति ने कॉलेज की 100 वर्षीय यात्रा को राष्ट्र-निर्माण और चरित्र निर्माण की गौरवशाली गाथा बताया।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि ऑफिस संभालने के बाद यह उनका केरल का तीसरा दौरा है और इसे उन्होंने बहुत खास बताया। उन्होंने कहा, "केरल अब केरलम बन गया है," जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान, गर्व और आत्मविश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने कॉलेज को महज एक कैंपस नहीं, बल्कि एक सदी से राष्ट्र को आकार देने वाली संस्था बताया। 1922 में स्थापित यह कॉलेज औपनिवेशिक काल में भी बौद्धिक जागृति का केंद्र रहा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्था ज्ञान और चरित्र दोनों की मार्गदर्शक रही है। इसके पूर्व छात्रों ने देश-विदेश में कॉलेज की रोशनी फैलाई है। उन्होंने खास तौर पर महान अभिनेता प्रेम नजीर, पूर्व मुख्यमंत्री वासुदेवन नायर और ओमन चांडी जैसे एल्युमनाई का जिक्र किया और कहा कि दो मुख्यमंत्री पैदा करना कॉलेज के सबसे बड़े योगदानों में से एक है।

शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "शिक्षा चरित्र बनाती है; पढ़े-लिखे नागरिक राष्ट्र को आकार देते हैं।" उन्होंने सीखने को जीवनभर की प्रक्रिया बताया और खुले दिमाग रखने की अपील की। एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने पर बल देते हुए कहा कि अपनी भावनाओं का सम्मान पक्का करने के लिए दूसरों का सम्मान जरूरी है।

टेक्नोलॉजी और विकास पर बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि टेक्नोलॉजी अपनाने का दौर खत्म हो चुका है। "भारत को क्रिएटर नेशन बनना चाहिए, ताकि दुनिया हमारी बनाई टेक्नोलॉजी अपनाए।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के विजन का जिक्र किया और कहा कि युवाओं की जोश से यह संभव है। सेंट बर्चमैन्स जैसे संस्थान जिम्मेदार नागरिक, इनोवेटर और लीडर तैयार करेंगे।

कॉलेज के मोटो 'कैरिटास वेरा नोबिलिटास' (दान ही सच्चा बड़प्पन है) का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि सच्चा बड़प्पन जन्म या धन में नहीं, बल्कि देने की भावना में है। दान पैसे तक सीमित नहीं; यह समय, ज्ञान, सपोर्ट या गाइडेंस भी हो सकता है। उन्होंने कहा, "अपने लिए जीना बुरा नहीं, लेकिन सिर्फ अपने लिए जीना बुरा है।"

उन्होंने छात्रों से समाज को कुछ लौटाने और मोटो को जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा, "आप इस कॉलेज की दूसरी शताब्दी हैं। अगले सौ साल आपके विचारों, साहस और प्रतिबद्धता से लिखे जाएंगे। बड़े सपने देखें, कड़ी मेहनत करें, और मूल्यों पर अडिग रहें।"

समापन में उन्होंने विश्वास जताया कि शताब्दी वर्ष एक अंत नहीं, बल्कि नए गौरवशाली युग की शुरुआत है। 'अगली सदी पिछली से अधिक चमके।'

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने बर्चमैन्स सेंटर फॉर इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और डॉ. के. एम. अब्राहम सेंटर फॉर एनर्जी एंड एनवायरनमेंट का उद्घाटन भी किया।कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी, केरल के मंत्री वी. एन. वसावन, कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. टेडी कंजूपरम्पिल, मैनेजर एंटनी एथाकड और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
 

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