नई दिल्ली, 28 फरवरी। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार समेत वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों ने शनिवार को यह बात कही।
विशेषज्ञों ने कहा कि इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष निवेशकों को सतर्क कर सकता है। हालांकि, घरेलू बाजार में भारी घबराहट वाली बिकवाली की बजाय कमजोर शुरुआत देखने को मिल सकती है।
यह चिंता तब बढ़ी जब इजरायल ने ईरान पर 'प्रीवेंटिव अटैक' यानी एहतियाती सैन्य हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया।
पहले आई खबरों के अनुसार, तेहरान में कई विस्फोट हुए और ईरान की राजधानी के कई इलाकों को निशाना बनाया गया।
जवाब में इजरायली रक्षा बलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर बताया कि पूरे इजरायल में सायरन बजाए गए और लोगों को मोबाइल फोन पर पहले से चेतावनी संदेश भेजकर सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए।
सेना ने इसे संभावित मिसाइल हमलों से जनता को तैयार करने के लिए एहतियाती कदम बताया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भू-राजनीतिक जोखिमों का अल्पकाल में शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार पहले ही तेज बिकवाली देख चुका है।
इस कारण सोमवार को कारोबार में बहुत बड़ी गिरावट या भारी अंतर के साथ बाजार खुलने की संभावना कम है।
विश्लेषकों के अनुसार, दलाल स्ट्रीट पर माहौल सतर्क बना रहेगा। बाजार में सीमित दायरे में या हल्की गिरावट के साथ कारोबार हो सकता है, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता के अगले दौर को लेकर स्पष्टता का इंतजार करेंगे।
उनका मानना है कि शुरुआती प्रतिक्रिया सीमित रह सकती है, लेकिन यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों ने बताया कि निफ्टी50 इंडेक्स अपनी 200-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) से नीचे बंद हुआ है, जिससे कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।
एक विशेषज्ञ ने कहा, "सूचकांक ने लगातार चौथी गिरावट वाली कैंडल बनाई है, जो मध्यम अवधि की कमजोरी और नकारात्मक रुझान की ओर संकेत करती है।"
तकनीकी रूप से निफ्टी50 के लिए 25,300-25,350 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 25,000-25,050 के बीच मजबूत सपोर्ट स्तर देखा जा रहा है।
एक एक्सपर्ट ने कहा, "यदि इंडेक्स सपोर्ट स्तर के ऊपर टिकता है तो कुछ स्थिरता लौट सकती है। लेकिन यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट का दबाव और बढ़ सकता है।"