मध्य प्रदेश में फिर गुलजार हुआ चीतों का बसेरा, कूनो पार्क पहुंचा दक्षिण अफ्रीका से नौ चीतों का तीसरा जत्था

मध्य प्रदेश में चीतों का कुनबा बढ़ा, श्योपुर पार्क में आया एक और दल


श्योपुर, 28 फरवरी। मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन का प्रयोग सफल रहा है। यही कारण है कि श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था यहां लाकर छोड़ा गया है। दक्षिण अफ्रीका के बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए नौ चीते (छह मादा व तीन नर) विशेष विमान से मध्यप्रदेश के ग्वालियर लाए गए और वहां से उन्हें हेलीकाप्टर से कूनो नेशनल पार्क लाया गया।

मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन का प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। यही कारण है कि श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था यहां लाकर छोड़ा गया है। दक्षिण अफ्रीका के बोत्स्वाना से एयरलिफ्ट किए गए नौ चीते (छह मादा व तीन नर) विशेष विमान से मध्यप्रदेश के ग्वालियर लाए गए और यहां से उन्हें हेलीकाप्टर के जिरये कूनो नेशनल पार्क लाया गया। बाद में केंद्रीय वन एवं जलवायु मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन चीतों को बाड़े में छोड़ा। यह लगभग एक माह तक क्वारेंटाइन रहेंगे।

जानकारों के मुताबिक ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब अपने प्रारंभिक चरण से आगे बढ़कर स्थायी स्थापना और सफल प्रजनन के चरण में प्रवेश कर चुका है। दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 वर्तमान में कूनो में पूर्णतः स्थापित और स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभ्यारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। ‘गामिनी’ दूसरी बार माँ बनी है। उसकी पहली गर्भावस्था से जन्में तीन सब-एडल्ट शावक स्वस्थ हैं और हाल ही में उसने तीन नए शावकों को जन्म दिया है।

‘वीरा’ अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है। दरअसल, एशिया से लुप्त हो चुके चीतों का मात्र तीन वर्षों में सफल पुनर्स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक सशक्त उदाहरण बन चुका है। प्रजनन करती मादा चीतों, स्वस्थ दूसरी पीढ़ी के शावकों और नए आवासों में विस्तार के साथ यह स्पष्ट है कि चीता अब भारत की वन पारिस्थितिकी का पुनः अभिन्न अंग बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले अपने जन्मदिन के मौके पर दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के पहले दल को छोड़ा था और उसके बाद यह तीसरा बड़ा दल यहां आया है।
 
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