पीएम मोदी का प्रहार: देश की जनता अब कांग्रेस को अपने वोट के काबिल नहीं मानती

इस देश की जनता अब कांग्रेस को अपने वोट के योग्य नहीं समझती: पीएम मोदी


नई दिल्ली, 27 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 'राइजिंग भारत समिट- 2026' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता। सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वह ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है। लेकिन इतिहास के लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों ने हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को हीनता से भर दिया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर यह भर दिया था कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी हैं।

उन्होंने कहा कि लेकिन इतिहास के लंबे कालखंड में, सदियों की गुलामी ने हमारी शक्ति की भावना को हीनता की भावना से भर दिया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधाराओं ने समाज में यह धारणा गहराई से बैठा दी थी कि हम अशिक्षित हैं और केवल अनुयायी हैं। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया था, जिसका खामियाजा हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण हम ट्रेड डील्स को लेकर हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि यह क्या हो गया, कैसे हो गया। विकसित देश, भारत से ट्रेड डील करने में इतने उत्सुक क्यों हैं? इसका उत्तर है, हताशा और निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत।

उन्होंने कहा कि अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस में होता तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील करता? बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोए हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। दुनिया हैरान होती है कि जिस भारत में 2014 तक करीब 3 करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वह आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप देशों में कैसे आ गया। जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद नहीं थी, वह आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया। जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट लतीफी और धीमी रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत और नमो भारत जैसी सेमी हाई स्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक, हर औद्योगिक क्रांति में भारत और वैश्विक दक्षिण के देश काफी हद तक अनुयायी ही रहे हैं। लेकिन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में, भारत न केवल भाग ले रहा है, बल्कि इसे आकार भी दे रहा है। आज हमारे पास अपना खुद का एआई स्टार्टअप इकोसिस्टम है। एआई शिखर सम्मेलन पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था। दुर्भाग्यवश, देश की सबसे पुरानी पार्टी ने इस राष्ट्रीय उत्सव को धूमिल करने का प्रयास किया। विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के सामने, कांग्रेस ने न केवल अपने कपड़े उतारे बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन का भी पर्दाफाश किया।

पीएम मोदी ने कहा कि एआई समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था, लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े ही नहीं उतारे, बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन को भी एक्सपोज कर दिया। जब नाकामी की निराशा और हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा हो, तो देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है, लेकिन इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी को सामने कर दिया। कांग्रेस हमेशा ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छिपाना हो, तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, लेकिन जब गौरवगान करना हो, तो एक परिवार को सारा श्रेय दे देती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में, विपक्ष का अर्थ केवल किसी भी बात का अंधाधुंध विरोध करना नहीं होता। इसका अर्थ है एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना। इसीलिए इस देश की जनता कांग्रेस को सबक सिखा रही है। और यह कोई नई बात नहीं है। जनता पिछले चार दशकों से ऐसा करती आ रही है। कांग्रेस को वोटों से वंचित नहीं किया जा रहा है। बल्कि, इस देश की जनता अब कांग्रेस को अपने वोट के योग्य नहीं समझती।

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध विरोध नहीं होता, बल्कि वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता कांग्रेस को सबक सिखा रही है। 1984 में कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट और 400 से अधिक सीटें मिली थीं, और इसके बाद के चुनावों में कांग्रेस के वोट लगातार कम होते चले गए। आज कांग्रेस की हालत ऐसी है कि देश में सिर्फ चार राज्य ही बचे हैं, जहां कांग्रेस के 50 से अधिक विधायक हैं। पिछले 40 वर्षों में देश में युवा वोटरों की संख्या बढ़ती गई, और कांग्रेस साफ होती गई।

उन्होंने कहा कि बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई है। अगर नेक नीयत होती, तो गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका नहीं जाता।
 
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