अभिनेता दिलीप को बरी करने के फैसले पर केरल सरकार का बड़ा वार, हाईकोर्ट में अपील दायर

केरल सरकार ने अभिनेता दिलीप को बरी करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की


कोच्चि, 27 फरवरी। केरल सरकार ने शुक्रवार को केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एर्नाकुलम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय के उस हालिया फैसले को चुनौती दी, जिसमें 2017 के अभिनेत्री अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम अभिनेता दिलीप को बरी कर दिया गया था, जबकि छह अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

दिसंबर 2025 में सत्र न्यायालय की न्यायाधीश हनी एम. वर्गीज ने दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन छह अन्य आरोपियों को दोषी पाया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 376डी (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत निर्धारित न्यूनतम सजा के रूप में 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

फैसले के बाद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। राज्य के विधि मंत्री पी. राजीव ने 8 दिसंबर को ही घोषणा की थी कि राज्य सरकार इस निर्णय को चुनौती देगी और पीड़िता के साथ खड़ी रहेगी।

अपील में राज्य सरकार ने दिलीप और तीन अन्य बरी किए गए आरोपियों चार्ली थॉमस, सनिलकुमार उर्फ मेस्थिरी सनिल और शरत जी. नायर को दोषी ठहराने की मांग की है। साथ ही, सरकार ने छह दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की सजा बढ़ाने की भी मांग की है। इनमें सुनील एन. एस. उर्फ पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, मणिकंदन बी., विजीश वी. पी., सलीम एच. उर्फ वडिवाल सलीम और प्रदीप शामिल हैं।

फरवरी 2017 में पीड़िता को कोच्चि में एक फिल्म की शूटिंग के लिए जाते समय अपहरण कर चलती गाड़ी में यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया था। इस घटना का वीडियो भी बनाया गया था। अगले ही दिन वाहन चालक मार्टिन एंटनी को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक सप्ताह के भीतर मुख्य आरोपी के रूप में नामित पल्सर सुनी को भी पकड़ लिया गया। उसी महीने चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था।

जुलाई 2017 में दिलीप को कथित रूप से प्रतिशोध की भावना से हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कही थी। लगभग तीन महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।

छह दोषियों को आपराधिक साजिश, अपहरण, अवैध बंधक बनाना, बल प्रयोग, सामूहिक दुष्कर्म तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत सीधे तौर पर केवल पल्सर सुनी को दोषी ठहराया गया।

दोषी ठहराए गए कई आरोपियों ने सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है, जिससे राज्य के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में कानूनी लड़ाई का नया चरण शुरू हो गया है।
 
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