शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का ऐलान: 'हम अकेले नहीं, स्वयं एक चलते-फिरते मठ हैं; अग्रिम जमानत नहीं देंगे'

हम अकेले नहीं हैं, अग्रिम जमानत दाखिल नहीं कर रहे: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद


वाराणसी, 26 फरवरी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "हम अग्रिम जमानत दाखिल नहीं कर रहे हैं। हम अकेले नहीं हैं।

हमारा मतलब सिर्फ अविमुक्तेश्वरानंद से नहीं है। जब कोई व्यक्ति शंकराचार्य के पद पर बैठता है तो वो स्वयं एक मठ बन जाता है। वर्तमान में, हम एक मठ हैं और इस ज्योतिष्पीठ पर बैठे हुए हैं। हम जिस आसन पर बैठे हैं, वह एक गतिशील चलता-फिरता मठ है। हमारा जो ज्योतिर्मठ है, वो उत्तराखंड में है, लेकिन हम उसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "जहां भी हम जाते हैं, ज्योतिर्मठ हमारे साथ होता है। उस स्थान के शंकराचार्य हमारे साथ होते हैं, इसलिए हम एक संगठन हैं और हमारे संगठन को संरक्षित करने के लिए हमारा एक परिकर वर्ग होता है। परिकर वर्ग हमारे संस्थान की रक्षा के लिए कार्य करता है।"

उन्होंने कहा, "अगर सब कुछ कानून के अनुसार हो तो किसी को क्या दिक्कत है? अगर गिरफ्तार करके ले जाएंगे तो क्या बाधा है?

उन्होंने आगे कहा, "हमें कोई बाधा नहीं है, आपको भी हम देख रहे हैं कि कोई बाधा नहीं है, लेकिन जेल में ले जाकर अगर जहर की सूई लगा दें आपको तो? इस प्रकार की कई सारी कहानियां सामने आ चुकी हैं कि जेल में ले जाकर गड़बड़ किया जाता है।

जब 1966 में गौ माता का आंदोलन चला था, तब केंद्र की सरकार ने गौ माताओं पर गोली चलाई थी और धर्म सम्राठ स्वामी जी महाराज और हमारे पीठ के पूर्व आचार्य सबको जेल में डाल दिया गया था। जेल में उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसके कारण धर्म सम्राठ के आंत में इतनी बड़ी चोट आई थी।"

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं, "इन्हीं सभी कारणों की वजह से हम बचाव करना चाहते हैं और उन्हें हमें अनुमति देनी पड़ेगी। हमें कोई खतरा नहीं है। अभी हमें मार दो, हमें क्या खतरा है? हम तो अपना श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर चुके हैं, लेकिन हमारे पीठ से जुड़े जो अनुयायी भक्त हैं, जो सनातन धर्मी हैं, उनकी भावना का क्या? उनका संरक्षण भी तो हमको करना है।"
 

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