वरदान फिल्म महोत्सव: मनोज जोशी ने अंगदान को बताया 'सबसे बड़ा दान', कहा- यह किसी को जीवन का उपहार

'कलयुग में दान का महत्व': वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पहुंचे अभिनेता मनोज जोशी ने बताया अंगदान का महत्व


नई दिल्ली, 26 फरवरी। अंगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जागरूकता लाने के लिए दधीचि देहदान समिति ने अनोखा कदम उठाया। समिति ने दिल्ली में पहला वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज किया है, जो दो दिन तक चलेगा।

इस मौके पर बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम में पहुंचे अभिनेता मनोज जोशी ने कार्यक्रम के उद्देश्य की तारीफ की और इस कदम को सराहनीय बताया।

अभिनेता मनोज जोशी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित पहला वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव एक वृत्तचित्र महोत्सव है जो अंगदान पर केंद्रित है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति गुजर जाता है तो उसके अंगों का दान किसी अन्य मनुष्य को जीवन का उपहार देता है, चाहे वह नेत्रदान हो या कोई अन्य अंगदान।"

उन्होंने आगे कहा, "वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अंगदान को लेकर एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है, जिसे बच्चों ने बनाया है। मैंने यहां एक केस भी देखा, जहां एक बैडमिंटन खिलाड़ी का हृदय ट्रांसप्लांट हुआ है और वो बिल्कुल ठीक है। यह देखकर बहुत अच्छा लगा है कि अंगदान की वजह से कई लोगों को नया जीवन दान मिल सकता है और इसके प्रति लोगों को जागरूक होना जरूरी है। वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का दिल से धन्यवाद, जो समाज को ऐसे गंभीर मुद्दों के प्रति प्रेरित कर रहा है। हमारा मानना है कि ये विषय भारत में हर किसी तक पहुंचना चाहिए। लोगों को समझना होगा कि अंगदान कितने परिवारों के चेहरों पर खुशी ला सकता है।"

अभिनेता मनोज के मुताबिक, पहले युगों में तप और जप का महत्व होता था, लेकिन कलयुग में दान का महत्व है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे फेस्टिवल का हिस्सा बनें और सोशल मीडिया के जरिए भी इस कार्यक्रम से लोगों को जागरूक करें। दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित वरदान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता को भी देखा गया। मुख्यमंत्री ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, "आज का दिन वाकई बेहद खुशी का क्षण है। हम यहां एक नेक काम के लिए आए हैं, जो अंगदान है। ऐसी चीज जिसकी जरूरत कोई कभी नहीं चाहता, लेकिन अगर जिंदगी में कभी ऐसी स्थिति आ जाए तो उस परिवार की हालत की कल्पना कीजिए। इस परिस्थिति से निकलने के लिए पूरे समाज को जागरूक होने की जरूरत है।"
 

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