यरूशलम, 26 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ‘रिच और प्रोडक्टिव’ यानी काफी सफल बताया है। प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने पीएम मोदी को मिले सम्मान, 16 एमओयू और समझौतों के साथ ही स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप से संबंधित अहम जानकारी साझा की।
उन्होंने कहा कि 24 घंटे से कुछ अधिक समय की यह यात्रा छोटी जरूर थी, लेकिन उपलब्धियों के नजरिए से देखें तो बेहद समृद्ध रही। जैसा कि इजरायली पीएम ने भी कहा कि ये विशेष थी। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर ये यात्रा हुई और इससे भारत-इजरायल संबंधों को नई दिशा मिली है।
उन्होंने बताया कि यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के रिश्तों को सक्रिय रूप से मजबूत कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में प्रधानमंत्री कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन, ओमान और अब इजरायल की यात्रा कर चुके हैं। साथ ही इस क्षेत्र के कई राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख भी भारत आ चुके हैं। जहां भी गए वहां उनको सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने में योगदान के लिए पीएम मोदी को इजरायली संसद का सम्मान मिला। ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ पाने वाले पीएम मोदी दुनिया के पहले शख्स हैं।
मिस्री ने पीएम मोदी के दौरे का पूरा ब्योरा देते हुए आगे बताया कि गुरुवार सुबह पीएम मोदी ने यद वाशेम, वर्ल्ड होलोकॉस्ट रिमेम्ब्रेंस सेंटर में होलोकॉस्ट पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत ओक का पौधा लगाया।
पीएम मोदी और पीएम नेतन्याहू के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में दोनों देशों ने विज्ञान, तकनीक, नवाचार, साइबर सिक्योरिटी, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा, व्यापार, और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
मिस्री ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद करीब 16 एमओयू और समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। ये समझौते विज्ञान, तकनीक, नवाचार, साइबर सिक्योरिटी, कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग समेत कई क्षेत्रों से जुड़े हैं।
भारत-इजरायल संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर पीस, इनोवेशन एंड प्रॉस्पेरिटी’ तक अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मजबूत साझेदारी का प्रतीक है।