मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले: "रा" से राजस्थान, "म" से मध्य प्रदेश मिलकर बढ़ा रहे राम की महिमा, बनेंगे तीर्थ स्थल

राजस्थान और मध्य प्रदेश मिलकर राम की महिमा बढ़ा रहे : मुख्यमंत्री मोहन यादव


भोपाल, 26 फरवरी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राम की महिमा राजस्थान और मध्य प्रदेश मिलकर बढ़ा रहे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार राम और कृष्ण के जहां-जहां चरण पड़े, उन स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर रही है।

मुख्यमंत्री यादव गुरुवार को राजस्थान के भीलवाड़ा में हरिशेवा उदासीन आश्रम के स्थानापति महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम महाराज की मौजूदगी में हुए सनातन मंगल महोत्सव, संत समागम एवं दीक्षा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सेवा, समर्पण, विश्व बंधुत्व और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की परोपकारी भावना में निहित हैं। सेवाभाव ही हमारी संस्कृति का प्राण है और जीवमात्र की सेवा ही श्रीहरि की सेवा है, सम्पूर्ण मानवता की सेवा है।

उन्होंने कहा कि 'रा से राजस्थान' और 'म से मध्यप्रदेश' मिलकर राम की महिमा बढ़ा रहे हैं। हमारी सरकार राम और कृष्ण के जहां-जहां चरण पड़े, उन स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर रही है। हम श्रीरामचन्द्र गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय तैयार कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों, करुणा, सद्भाव और समरसता के प्रसार में संतजनों की भूमिका निरापद रूप से अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। हंसराम महाराज धर्म के सभी मूल्यों, भक्ति, सेवा, सत्य और अहिंसा को जीवंत रख रहे हैं। आश्रम के माध्यम से हजारों असहायों को सहारा दिया।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकारें जीवन मूल्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा और पर्यावरण पर एकजुट होकर काम कर रही हैं। हमें संकल्प लेना होगा कि बच्चों को वेद-पुराण पढाएं, संस्कार दें, सेवा में लगाएं और धर्म की रक्षा करें। धर्म केवल पूजा नहीं, हमारी जीवन पद्धति है। सेवा से श्रीहरि मिलते हैं। भक्ति से मुक्ति मिलती है। इसलिए हम सब मिलकर संकल्प लें कि समाज में एकता लाएंगे, युवाओं को अच्छे संस्कार देंगे और भारत को एक बार फिर विश्व गुरु बनाएंगे।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन को देशभर के साधु-संतों का आशीर्वाद मिलता रहा है। सनातन संस्कृति में हमारे बच्चे परिवार को अमरता प्रदान करते हैं। यत्र पिंडे-तत्र ब्रह्मांडे, जैसा हमारे पिंड में है वैसा ही ब्रह्मांड में है। संतों के माध्यम से करोड़ों साल से ज्ञान की गंगा प्रवाहित होती रही है। साधु-संतों के जरिए हमें देवताओं के दर्शन होते हैं। सनातन मंगल महोत्सव एवं संत समागम में तीन युवा संतों ईशानराम महाराज, केशवराम महाराज और सुमज्ञराम महाराज को सन्यास की दीक्षा दिलाई गई।

मुख्यमंत्री यादव ने तीनों युवा संन्यासियों का माल्यार्पण एवं नमन करते हुए उनका अभिनंदन किया।
 

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