बिहार में शराबबंदी बनी मजाक? सत्ता और विपक्ष में तकरार तेज, विधानसभा में लगे आरोपों के 'जाम'

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार जारी


पटना, 26 फरवरी। बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शुक्रवार को समाप्त होने वाला है। इस सत्र में प्रदेश में शराबबंदी कानून को लेकर जमकर बयानबाजी देखने को मिली। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने गुरुवार को साफ कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून मजाक बनकर रह गई है।

राजद के विधायक भाई वीरेंद्र ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बिहार में शराब की होम डिलीवरी हो रही है। जब बॉर्डर पर सुरक्षा है तो शराब की खेप कैसे आ रही है?

उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि एनडीए के रसूखदार नेताओं की देखरेख में शराब की खेप आ रही है। सरकार को इस पर सख्ती से काम करना चाहिए। जितनी शराब बैन के पहले नहीं खपत होती थी, उससे ज्यादा आज हो रही है।

इधर, राजद के एमएलसी सुनील कुमार के 'विधानसभा में शराब की डिलीवरी' कराने वाले बयान पर जदयू के एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 27 फरवरी का शुभ दिन जल्द आने वाला है। हम लोगों के लिए भी एक उपलब्धि होगी। ऐसे कृत्य में जो पाया जाएगा, वह गिरफ्तार होगा।

उन्होंने कहा कि आगे कोई अपराध करके देखे, तब अपराध के लिए जो कानून बना है, उसका असर कैसा होता है, पता चल जाएगा। तेजस्वी यादव की पार्टी राजद ने शराब कंपनियों से 46 करोड़ से अधिक की राशि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा लिया है। जिसका खाइएगा, उसका गाइएगा।

बता दें कि राजद के विधान पार्षद सुनील कुमार ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां शराब नहीं मिलती है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि बजट सत्र के अंतिम दिन वे विधान मंडल परिसर में शराब की डिलीवरी कराके दिखा देंगे।

विधान मंडल परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राजद अध्यक्ष लालू यादव के करीबी माने जाने वाले सुनील कुमार ने दावा करते हुए कहा कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में शराब की खपत कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गई है और अब शराब से ज्यादा 'सूखा नशा' युवाओं को बर्बाद कर रहा है।
 

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