'भारत रणभूमि दर्शन अभियान' का समापन: थल सेना ने रण और थार के दुर्गम क्षेत्रों को पार कर दिखाया अदम्य शौर्य

‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का औपचारिक समापन, यात्रा ने कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों को किया पार


नई दिल्ली, 25 फरवरी। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बुधवार को ‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का औपचारिक समापन किया। भारत रणभूमि दर्शन अभियान की यह लंबी यात्रा लगभग 3,400 किलोमीटर की थी। यह गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्रों और अग्रिम सीमावर्ती इलाकों से होकर गुजरी।

यात्रा के दौरान दल ने कच्छ का रण और थार मरुस्थल जैसे दुर्गम क्षेत्रों को पार किया। यह अभियान भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। भारत रणभूमि दर्शन अभियान के दौरान देश के विभिन्न और दूर दराज के इलाकों में विकसित हो रही सड़कों और संपर्क व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया।

गौरतलब है कि इनमें कई मार्ग ऐसे भी हैं जो सेना की तैयारियों और सीमावर्ती नागरिकों की सुविधा दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। बुधवार को यात्रा के समापन के अवसर पर कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर किया गया।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य देश के ऐतिहासिक युद्ध स्थलों और सीमावर्ती क्षेत्रों को लोगों से जोड़ना था। साथ ही नई पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान के बारे में जागरूक करना भी इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था।

थल सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे प्रयास देश के गौरवशाली इतिहास को जीवित रखते हैं और युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते हैं। यह अभियान 3 फरवरी को गुजरात के तटीय शहर द्वारका से शुरू हुआ था। लगभग 3,400 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण युद्ध क्षेत्रों और अग्रिम सीमावर्ती इलाकों से होकर गुजरी। इस अभियान में कुल 35 सदस्य शामिल थे। इनमें आर्टिलरी रेजिमेंट के जवानों के साथ-साथ भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के कर्मी भी शामिल रहे।

इस यात्रा के मार्गों में सैन्य दल ने पश्चिमी मोर्चे के प्रमुख युद्ध स्मारकों पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वीर नारियों, पूर्व सैनिकों, राष्ट्रीय छात्र सेना के कैडेटों, विद्यार्थियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों से भी संवाद किया। हर पड़ाव पर स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों ने अभियान दल का स्वागत किया।

इससे यह संदेश गया कि देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों और नागरिकों के बीच गहरा विश्वास और सम्मान का संबंध है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत रणभूमि दर्शन अभियान का सफल समापन दर्शाता है कि भारतीय सशस्त्र बल अपने वीर अतीत को सम्मान देते हुए वर्तमान से जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही वे भविष्य की पीढ़ी को एक सुरक्षित, एकजुट और सशक्त भारत का संदेश भी दे रहे हैं।
 
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