AI और डीपफेक से पहचान के गलत इस्तेमाल पर लगाम! काजोल के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

काजोल के पक्ष में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, एआई और डीपफेक पर लगाई रोक


नई दिल्ली, 25 फरवरी। दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल के पक्ष में एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने काजोल के नाम, तस्वीर, आवाज और उनकी पूरी पहचान के गलत इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिए मशहूर हस्तियों की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। यह व्यक्ति की गरिमा पर सीधा हमला है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच की जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनाया।

इस मामले में काजोल ने कई वेबसाइट्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज, एआई चैटबॉट साइट्स और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत की थी। इन अज्ञात लोगों को कानूनी भाषा में 'जॉन डो' कहा जाता है, जिनकी पहचान अभी सामने नहीं आई है, लेकिन जो ऑनलाइन गलत गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।

काजोल की याचिका में आरोप लगाया गया कि बड़ी संख्या में उनकी तस्वीरों और नाम का इस्तेमाल करके ऑनलाइन मर्चेंडाइज बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा, एआई की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही थीं। कुछ वेबसाइट्स पर उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए अश्लील एआई चैटबॉट चलाए जा रहे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि काजोल भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की एक जानी-मानी और सम्मानित अभिनेत्री हैं, जिनका करियर लगभग चार दशकों का रहा है। उन्हें पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी पहचान एक मजबूत ब्रांड है, जिसे उन्होंने सालों की मेहनत से बनाया है। इस पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ है और ऐसे मामलों में अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है, ताकि किसी भी तरह का गलत फायदा उठाने से रोका जा सके।

कोर्ट ने कहा कि जो वेबसाइट्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस काजोल के नाम और तस्वीर वाले सामान बेच रहे थे, अगर ऐसा सामान घटिया क्वालिटी का हुआ, तो इससे काजोल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।

जज ज्योति सिंह ने अपने आदेश में कहा, ''सभी दस्तावेज और शिकायत को देखने के बाद यह साफ है कि काजोल का मामला मजबूत है। अगर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती, तो उन्हें नुकसान हो सकता था, जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं है।''

अदालत ने इस पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।

इस आदेश के तहत अदालत ने सभी आरोपियों और अज्ञात लोगों को काजोल की पहचान के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। इसमें उनका नाम, फोटो, आवाज, चेहरा, हाव-भाव और उनकी पहचान से जुड़ा हर पहलू शामिल है। खासतौर पर एआई, जनरेटिव एआई, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और चैटबॉट जैसे टूल्स के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई गई है।

कोर्ट ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और मर्चेंडाइज बेचने वालों को आदेश दिया है कि वे 72 घंटे के भीतर काजोल से जुड़े सभी गलत प्रोडक्ट्स को हटाएं और संबंधित लिंक डिलीट करें। सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स को भी आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब को भी निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी आदेश दिया गया है कि वे अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट होस्ट करने वाली वेबसाइट्स को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करें। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
 
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