पुंछ, 25 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के गनी वन क्षेत्र में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने संयुक्त खुफिया सूचनाओं के आधार पर एक बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया। इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन गनी' रखा गया। यह जानकारी व्हाइट नाइट कोर नामक सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुफिया सूचनाओं पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने विस्तृत तलाशी अभियान शुरू किया। समन्वय और सटीकता के साथ की गई इस खोज में एक प्राकृतिक गुफा के नीचे छिपा हुआ आतंकी हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा मिला।
बरामद सामग्री में एक बड़ा आईईडी (4.5 किलोग्राम), एक छोटा आईईडी (800 ग्राम), दो चीनी ग्रेनेड, एक 9 मिलीमीटर पिस्तौल, दो 9 मिलीमीटर कारतूस और बाईस 7.62 मिलीमीटर कारतूस शामिल थे।
बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही इन आईईडी और ग्रेनेड को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। इससे इलाके में आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
यह अभियान अपने सोर्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर प्राप्त संयुक्त खुफिया इनपुट्स पर आधारित था। सुरक्षा बलों ने सटीकता और टीमवर्क का शानदार प्रदर्शन किया, जिससे आतंकियों के छिपे हुए संसाधनों को नष्ट करने में सफलता मिली।
पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मेंढर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल भीतरी इलाकों में आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाते हैं, जबकि सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) क्रमशः नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) की सुरक्षा करते हैं।
जम्मू-कश्मीर में 740 किलोमीटर लंबी एलओसी और 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। एलओसी घाटी के कुपवाड़ा, बांदीपोरा और बारामूला जिलों और जम्मू क्षेत्र के पुंछ, राजौरी और आंशिक रूप से जम्मू जिले में स्थित है। अंतरराष्ट्रीय सीमा जम्मू मंडल के सांबा, कठुआ और जम्मू जिलों में स्थित है।
सेना और बीएसएफ सीमा के पाकिस्तानी हिस्से से घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी और ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात हैं।
ऐसे अभियानों से सीमा क्षेत्र में आतंकवाद की गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलती है। व्हाइट नाइट कोर और एसओजी पुंछ ने इस सफलता से इलाके में शांति और सुरक्षा को मजबूत किया है। तलाशी अभियान जारी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही खत्म किया जा सके।
यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का हिस्सा है, जिसमें सुरक्षा बल लगातार सक्रिय रहते हैं।