द 50 से बाहर हुए रचित रोझा ने खोले शो के राज, बताया कैसे हरियाणा के दम पर बनाई धाक!

'द फिफ्टी' से निकले क्रिएटर रचित रोझा ने शेयर किया शो का अनुभव, बताया कैसे बनाई 50 लोगों के बीच जगह


मुंबई, 25 फरवरी। मशहूर क्रिएटर रचित रोझा 'द 50' में अपनी धाक जमाने के बाद शो से बाहर हो चुके हैं। दर्शकों को क्रिएटर का बेबाकपन बहुत पसंद आया और यही वजह रही कि वे लंबे समय तक अकेले दम पर शो में टिके रहे।

अब उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में शो से जुड़े कई राज खोले और बताया कि कैसे हरियाणा के मजबूत बैकग्राउंड की मदद से वे खुद को शो में शारीरिक और मानसिक तरीके से तैयार कर सके।

'द 50' को लेकर मिले ऑफर पर रचित ने कहा, "मेरी पहली प्रतिक्रिया यह थी कि यह एक नया प्लेटफॉर्म है, इसलिए मैंने सोचा, क्यों न इसे आजमाया जाए? मेरे दर्शक लंबे समय से मुझे किसी रियलिटी शो में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। मुझे लगा कि उनकी बात सुनने और कुछ नया करने का यही सही समय है।"

शो में एंट्री के बाद की रणनीति पर रचित ने कहा, "जब मैं पहली बार महल में दाखिल हुआ, तो मैंने भव्य साज-सज्जा देखी और मजाक में कहा कि यह थर्माकोल से बना लग रहा है। शायद शो के बाद इसे तोड़ दिया जाएगा। हम सब आपस में हंस रहे थे कि बाद में हर चीज का दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। गंभीरता से कहूं तो मेरी एकमात्र रणनीति थी कि मैं हर काम में अपनी पूरी ऊर्जा और समर्पण लगाऊं। मैंने अपना पूरा ध्यान अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस देने पर रखा।"

क्रिएटर ने शो में अपनी जर्नी पर कहा कि बिल्कुल, जिस तरह से मेरा पालन-पोषण हुआ, उसने मुझे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाया। टास्क के दौरान, मुझे एहसास हुआ कि ताकत सिर्फ मांसपेशियों या जिम ट्रेनिंग से नहीं आती। जब मैंने शारीरिक रूप से मजबूत दिखने वाले प्रतियोगियों से बेहतर प्रदर्शन किया, तो मुझे अपनी जड़ों और उस सरल जीवनशैली पर गर्व महसूस हुआ, जिसने मुझे आकार दिया है। यह शक्ति मेरे अंदर बचपन से ही है।

रचित ने सभी कंटेस्टेंट के बीच अपनी पहचान बनाने के सवाल पर कहा, "मेरे लिए यह चुनौतीपूर्ण नहीं था। सोशल मीडिया पर मैंने शून्य से शुरुआत की और निरंतर प्रयास से नाम बनाया। कड़ी मेहनत और ईमानदारी हमेशा से मेरा दृष्टिकोण रहा है। इसलिए इतने सारे प्रतियोगियों के बीच भी, मैंने बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान केंद्रित किया। जब आप अपना पूरा प्रयास करते हैं, तो पहचान अपने आप मिल जाती है।"

रियलिटी शो में गेम की टैक्टिक पर बात करते हुए रचित ने कहा, "मेरे लिए, रियलिटी शो में वास्तविकता झलकनी चाहिए। अगर मैं ईमानदार हूं, तो मैं ईमानदार ही रहूंगा। मैं जीतने के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं कर सकता। मेरे दर्शक मुझे करीब से देखते हैं। ट्रॉफी जीतना एक बात है, लेकिन लोगों का दिल जीतना ज्यादा मायने रखता है।"

रचित पर प्रिंस नरूला और करण पटेल के बाद गद्दारी करने का आरोप लगा। इस पर क्रिएटर ने कहा, "अगर कोई अपना वचन देता है, तो उसे निभाना चाहिए। बार-बार पक्ष बदलना कुछ लोगों के लिए खेल का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। घर के अंदर व्यवहार की बात करें तो, मेरा मानना है कि कथनी से ज्यादा करनी मायने रखती है। अगर कोई व्यक्ति कार्यों के बजाय बहस या विवादों में ज्यादा शामिल होता है, तो दर्शक अपनी राय बना सकते हैं।"

करण पटेल के साथ हुई तीखी बहस पर उन्होंने कहा कि मेरा इरादा हमेशा टास्क पर ध्यान केंद्रित करना और आगे बढ़ना था। हालांकि, अगर कोई मेरे सामने मेरा अपमान करता है या अनुचित भाषा का प्रयोग करता है, तो मैं अपनी आवाज उठाऊंगा। आत्मसम्मान सर्वोपरि है, चाहे खेल के अंदर हो या बाहर। मैं अपने बयान पर कायम हूं। अगर किसी में सीधे प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास नहीं है, तो वे अन्य तरीके अपना सकते हैं और उसे रणनीति का नाम दे सकते हैं। यह उनका तरीका हो सकता है, लेकिन मेरा नहीं।
 

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