राहुल को 'नकारात्मक राजनीति का पोस्टर ब्वॉय' बता पीयूष गोयल का बड़ा हमला, बोले- विदेशी ताकतों से समझौता

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर तीखा तंज, बताया- 'नकारात्मक राजनीति का पोस्टर ब्वॉय'


नई दिल्ली, 25 फरवरी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पटना में पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि किस तरह गांधी परिवार 'कम्प्रोमाइज राजनीति' का उदाहरण रहा है। पीयूष गोयल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी लगातार देशहित से समझौता करती रही है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास हो या वर्तमान या फिर भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न मामले, इन सभी से संकेत मिलते हैं कि पार्टी विदेशी ताकतों के प्रभाव में जनहित और राष्ट्रहित से समझौता करती रही है। इस तरह की राजनीति देश और देशवासियों के उज्ज्वल भविष्य को नुकसान पहुंचाती है और इसके अनेक उदाहरण जनता के सामने हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कभी सोरोस तो कभी पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर अपने ही देश के खिलाफ रुख अपनाते नजर आते हैं। केंद्रीय मंत्री गोयल ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का काम किया है और वे विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करते दिखाई देते हैं।

गोयल ने राहुल गांधी को 'नकारात्मक राजनीति के पोस्टर ब्वॉय' बताते हुए कहा कि वे 247 बार विदेश यात्राएं कर चुके हैं और कई बार प्रोटोकॉल की अनदेखी की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्र लद्दाख में राहुल गांधी ऐसे विदेशी व्यक्तियों के संपर्क में रहे जो भारत के हितों के खिलाफ काम करते हैं।

बोफोर्स मामले का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि एक मित्र ओटावियो को बचाने के लिए निष्पक्ष जांच नहीं होने दी गई और गांधी परिवार ने देश से समझौता किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी के दौर में भी कांग्रेस पर विदेशी एजेंसियों के प्रभाव के आरोप लगते रहे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक, परिवार के कई नेताओं पर देशहित से समझौते के आरोप लगे। उन्होंने 1971 के शिमला समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा कर दिया गया, लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर वापस क्यों नहीं लिया गया?

उन्होंने यह भी कहा कि 1954 में नेहरू ने तिब्बत में भारत के अधिकार छोड़ दिए थे, जो उनके अनुसार एक और बड़ा समझौता था। उन्होंने दावा किया कि नेहरू-गांधी परिवार की राजनीति हमेशा से देशहित के साथ समझौते की रही है।
 

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