रमजान में इफ्तार को लेकर शोएब जमई की मांग: सरकारी दफ्तरों से मुस्लिम कर्मचारियों को मिले जल्दी छुट्टी

एआईएमआईएम नेता शोएब जमई की मांग- रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को सरकारी दफ्तरों से मिले जल्दी छुट्टी


नई दिल्ली, 25 फरवरी। एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जमई ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों को ऑफिस से जल्दी छुट्टी देने की मांग की है। शोएब ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को हमारी मांग पर गौर करना चाहिए। इस बारे में फैसले से एक अच्छा संदेश भी जाएगा।

शोएब जमई ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "रमजान में सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों की इच्छा होती है कि वे अपने घर पहुंचकर इफ्तार करें। दिल्ली में शाम के समय बहुत ज्यादा ट्रैफिक जाम रहता है। इसलिए हमारी मांग है कि मुस्लिम कर्मचारियों को ड्यूटी टाइम में छूट दी जानी चाहिए, ताकि वे सही समय पर अपने घर लौट सकें और इफ्तार करें।"

लुधियाना यूनिवर्सिटी में इफ्तार को लेकर विवाद पर एआईएमआईएम नेता ने कहा, "कश्मीरी स्टूडेंट्स की क्या गलती है? वे पूरे देश में पढ़ते हैं। मैंने यह साउथ इंडिया में भी देखा है और नॉर्थ इंडिया में भी, वे बड़ी संख्या में पढ़ते हैं। वे हमारी जामिया यूनिवर्सिटी में भी पढ़ते हैं। मुसलमानों के लिए रोजा और इफ्तार उनके धार्मिक काम का हिस्सा है, और वे इसे रखेंगे। जब दूसरे धर्मों का सम्मान किया जाता है और मनाया जाता है, तो रोजा और इफ्तार में क्या गलत है?"

बिहार में मीट और मछली की खुली बिक्री पर बैन को लेकर शोएब जमई ने कहा, "यह मुख्य रूप से हाइजीन का मामला है। लेकिन अगर कोई मछली और मीट पर आपत्ति जताता है, तो मैं यह बताना चाहूंगा कि देश में लगभग 90 प्रतिशत हिंदू मछली और मीट खाते हैं।"

इसी बीच, शोएब जमई ने एआई समिट में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन की निंदा की। शोएब ने कहा, "अगर कांग्रेस आलाकमान को इसकी जानकारी पहले से थी, तो यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें लोकतंत्र के अंदर विपक्ष की भूमिका निभानी है, लेकिन हम अपने देश की बेइज्जती कराने को बिल्कुल सही नहीं समझते हैं।"

शोएब जमई ने आगे कहा, "मैं खुद एआई समिट में गया था। मेरी टीम भी वहां थी। आप जानते हैं कि राजनीति के अलावा, हम वैज्ञानिक क्षेत्र में भी काम करते हैं और हमारी टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एरिया में काम कर रही है। इसलिए, हम रिसर्चर के तौर पर समिट में शामिल हुए थे। वहां जो व्यवस्था देखी, हमने उसकी आलोचना की। लेकिन विदेशी मेहमानों के सामने गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जो किया, आप (कांग्रेस) भी वही कर रहे हैं। वो मंच सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन करने का नहीं था। विरोध प्रदर्शन की अनेकों जगह हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह ख्याल रखा जाना चाहिए।"
 

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