चीन को मात देने की अमेरिकी रणनीति: भारत बना महत्वपूर्ण साथी, AI-खनिज सप्लाई चेन पर फोकस

चीन के दबदबे को कम करने की अमेरिकी रणनीति : भारत की भूमिका अहम, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों पर जोर


वाशिंगटन, 25 फरवरी। अमेरिका चीन के दबदबे को कम करने की दिशा में भारत को एक अहम साझेदार के रूप में आगे बढ़ा रहा है। खासकर रेयर अर्थ मिनरल्स और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन्स के मामले में अमेरिका भारत को रणनीतिक स्तंभ मान रहा है। यह बात अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आर्थिक सुरक्षा पर हुई महत्वपूर्ण कांग्रेसनल चर्चा के दौरान कही।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सामने इकोनॉमिक ग्रोथ, एनर्जी और एनवायरनमेंट के अंडरसेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग ने कहा कि भारत औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले “पैक्स सिलिका” कोएलिशन में शामिल हो गया है, यह एक पहल है जिसका मकसद सहयोगी देशों के बीच जरूरी मिनरल, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सप्लाई चेन्स को सुरक्षित करना है।

हेलबर्ग ने कहा कि हाल ही में भारत का इस समूह में स्वागत किया गया है। उन्होंने “पैक्स सिलिका” को एआई के इस युग के लिए बनाई गई आर्थिक सुरक्षा साझेदारी बताया। उनका कहना था कि आने वाले दशकों में वही देश वैश्विक नेतृत्व करेगा जो एआई की औद्योगिक बुनियाद पर नियंत्रण रखेगा। जो देश ऐसा नहीं कर पाएगा, उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

हेलबर्ग ने भारत की खास ताकतों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, मानव संसाधन और प्रतिभा के मामले में भारत दुनिया में ऐसा देश है जो चीन को टक्कर दे सकता है। साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा खनिज परिष्करण करने वाला देश है।

उन्होंने कहा कि चीन अभी “दुनिया की लगभग 90 परसेंट रिफाइनिंग कैपेसिटी” को प्रोसेस करता है, और सप्लाई चेन का एक देश में होना एक “बुनियादी चुनौती” है जिसे दूर करने के लिए अमेरिका तेजी से काम कर रहा है।

उन्होंने कमेटी को बताया कि इस स्ट्रेटेजी में “ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स” के ज़रिए सहयोगी देशों में रिफाइनिंग कैपेसिटी बढ़ाना और भारत, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में माइनिंग और मिनरल प्रोसेसिंग वेंचर्स में प्राइवेट कैपिटल लगाना शामिल है।

हेलबर्ग ने यह भी कहा कि अमेरिका चीन की व्यापार और औद्योगिक नीतियों का मुकाबला करने के लिए आर्थिक सहयोग, निर्यात नियंत्रण और आपूर्ति शृंखला में विविधता जैसी रणनीतियों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "चीन ने हमसे अलग होने के अपने प्लान और इरादों को छिपाया नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम उन पर निर्भर रहने में सहज हैं, जबकि वे सक्रिय तौर पर हमसे अलग होने की कोशिश कर रहे हैं?"

चर्चा के दौरान अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर राजनीतिक मतभेद सामने आए, लेकिन चीन के बढ़ते वर्चस्व को लेकर दोनों दलों में चिंता देखी गई।

हेलबर्ग ने बताया कि हाल ही में अमेरिका की अगुवाई में 55 देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य चीन के कंट्रोल वाली सप्लाई चेन के विकल्प तलाशना था। उन्होंने ट्रेड पर अमेरिका और भारत के हालिया संयुक्त बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में भारत द्वारा अमेरिका से बड़ी खरीद और सीमा पार निवेश बढ़ाने की बात कही गई है।

अंत में हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और उन्हें इस संबंध की दिशा पर पूरा भरोसा है।
 
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