बांग्लादेश: अवामी लीग का जोरदार पुनरुत्थान! दफ्तर खुले, झंडे फहराए; मुख्यधारा की राजनीति में होगी वापसी?

बांग्लादेश: अवामी लीग ने फिर खोले दफ्तर, मुख्यधारा की राजनीति में वापसी के संकेत


ढाका, 24 फरवरी। बांग्लादेश की अवामी लीग के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। देश के कई जिलों में जमीनी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाल ही में पार्टी कार्यालय दोबारा खोल दिए हैं, राष्ट्रीय और पार्टी झंडे फहराए हैं तथा पोस्टर-बैनर लगाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन गतिविधियों पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं की गई है।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द डिप्लोमैट में लिखते हुए बांग्लादेशी शोधकर्ता और पत्रकार पूर्णिमा चौहाण ने कहा कि ये कदम महज औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि पार्टी की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी का संकेत देते हैं और कार्यकर्ताओं को “मनोवैज्ञानिक संदेश” देते हैं कि पार्टी पुनरुत्थान की ओर बढ़ रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार, जिसने 15 वर्षों से अधिक समय तक बांग्लादेश पर शासन किया, को 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटने के बाद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मई 2025 में मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया और 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनाव में उसे हिस्सा लेने से रोक दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी पर प्रतिबंध के अलावा, उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और मुकदमे दर्ज किए गए। न तो शेख हसीना और न ही उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय, जिन्हें उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जाता है, इस समय देश में हैं। अन्य नेता या तो बांग्लादेश में छिपकर रह रहे हैं या विदेश में हैं। ऐसे में संगठन का पुनर्गठन बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की सरकार अवामी लीग को मुख्यधारा की राजनीति में फिर से प्रवेश करने देगी। उल्लेखनीय है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी उम्मीदवारों का समर्थन किया था। इससे दोनों दलों के बीच एक प्रकार का संपर्क स्थापित हुआ है। कुछ बीएनपी समर्थित सांसदों ने भी अवामी लीग की राजनीति में वापसी के पक्ष में बयान दिए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवामी लीग सिर्फ अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है या राजनीतिक वापसी की तैयारी में है। चुनाव-पूर्व सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि पार्टी चुनाव लड़ती तो उसका प्रदर्शन संतोषजनक रह सकता था, जिससे संकेत मिलता है कि उसके लिए अस्तित्व का संकट उतना गहरा नहीं है।

हालांकि, यदि पार्टी मजबूत वापसी चाहती है तो केवल प्रतीकात्मक कदम पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए ठोस कार्ययोजना, जनोन्मुख नीतियां, युवाओं की भागीदारी और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठोस कार्यक्रमों के अभाव में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, वैकल्पिक नेतृत्व को लेकर अटकलें बढ़ती हैं और विघटन की आशंकाएं भी जन्म लेती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हालिया गतिविधियों से यह स्पष्ट नहीं है कि अवामी लीग फिलहाल रणनीतिक रूप से खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है या वास्तव में वापसी की तैयारी में है। इतना जरूर है कि बांग्लादेश की राजनीति में नया मंथन शुरू हो चुका है और साजेब वाजेद जॉय इस प्रक्रिया के केंद्र में नजर आ रहे हैं।
 
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