आंध्र प्रदेश: मिलावटी दूध ने ली 4 जानें, 7 अब भी मौत से जूझ रहे; बच्चों समेत 15 अस्पताल में

आंध्र प्रदेश दूध मिलावट मामला: सात लोगों की हालत अब भी गंभीर, चार की मौत


अमरावती, 24 फरवरी। आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में मिलावटी दूध पीने से बीमार हुए लोगों में से सात की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त वीरापांडियन ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कुल 15 लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इनमें से तीन मरीज वेंटिलेटर पर, दो डायलिसिस पर और तीन वेंटिलेटर-डायलिसिस सपोर्ट पर हैं। इलाज करा रहे मरीजों में दो बच्चे भी शामिल हैं, जिनमें एक पांच महीने का शिशु है।

अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ। आयुक्त ने कहा कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट रविराज की सलाह पर किडनी की कार्यक्षमता को तेजी से सुधारने वाली कुछ विशेष दवाएं, जो यहां उपलब्ध नहीं थीं, चेन्नई और मुंबई से मंगाई जा रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, 16 फरवरी को दूध घरों तक पहुंचाया गया था। चूंकि कुछ लोगों में लक्षण देर से भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की गई है। यह व्यवस्था अगले एक महीने तक जारी रहेगी।

एक ही विक्रेता से दूध लेने वाले 110 परिवारों के 315 लोगों के रक्त नमूने लिए गए। इनमें से दो लोगों में क्रिएटिनिन का स्तर अधिक पाया गया, जबकि एक में संदिग्ध लक्षण मिले। इन तीनों को अस्पताल में भर्ती किया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

वीरापांडियन ने कहा कि अब तक दूध में यूरिया के कोई अंश नहीं मिले हैं। उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि यदि दूध में यूरिया मिलाया भी गया हो, तो किडनी या लीवर फेल जैसी गंभीर समस्याएं तुरंत उत्पन्न नहीं होतीं, बल्कि लंबे समय तक सेवन करने पर असर पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल मिलाया गया हो तो तीन से चार दिन बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ प्रिवेंटिव मेडिसिन संस्थान (फूड सेफ्टी विभाग) के निदेशक नीलकंठ रेड्डी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि दूध को ठंडा रखने वाली मशीन में कूलेंट के रूप में इस्तेमाल होने वाला एथिलीन ग्लाइकॉल लीक हो गया था।

प्रभावित परिवारों द्वारा उपयोग किए गए दही, घी, सिरका और दूध के शेष नमूनों के करीब 10 सैंपल लेकर हैदराबाद और काकीनाडा स्थित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए हैं।

दूध के सीधे नमूने उपलब्ध नहीं हो सके, लेकिन दही, पनीर, घी और क्रीम के सैंपल लिए गए हैं। पानी के नमूनों की रिपोर्ट बुधवार से शनिवार के बीच चरणबद्ध तरीके से आने की संभावना है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन रिपोर्टों के बाद मिलावट के स्रोत को लेकर स्पष्टता मिलेगी।

विक्रेता पहले से ही पुलिस हिरासत में है और उससे मिली जानकारी के आधार पर जांच जारी है। दूध भंडारण में एथिलीन ग्लाइकॉल के उपयोग और संबंधित पहलुओं की भी जांच की जा रही है। दूध कूलिंग मशीन की मरम्मत करने वाले मैकेनिक से भी पूछताछ की गई है।

नीलकंठ रेड्डी ने घोषणा की कि बुधवार से पूरे राज्य में दूध व्यापारियों, निर्माताओं, भंडारण मालिकों और थोक विक्रेताओं से नमूने एकत्र करने का अभियान शुरू किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान यह भी जांच की जाएगी कि उनके पास अधिकृत लाइसेंस है या नहीं।
 
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