निर्वाचन आयोग ने 'शुद्ध मतदाता सूची' पर राज्य आयुक्तों संग राष्ट्रीय गोलमेज वार्ता की, लोकतंत्र होगा सशक्त

भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया


नई दिल्ली, 24 फरवरी। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया।

यह सम्मेलन 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ शामिल हुए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बने।

सम्मेलन का मुख्य फोकस शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना था, जिसे लोकतंत्र का मूल आधार बताया गया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि कुशल और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने से लोकतंत्र मजबूत होता है।

राष्ट्रीय तथा संवैधानिक हित में निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ बेहतर समन्वय बनाने का सुझाव दिया। इसमें ईसीआईनेट डिजिटल प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनें, मतदाता सूची तथा भारतीय निर्वाचन प्रबंधन संस्थान जैसी विश्व स्तरीय सुविधाओं को साझा करने के लिए आपसी सहमति वाली व्यवस्था और कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया।

निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्त पंचायतों तथा नगर निकायों के चुनाव से जुड़े कानूनों को संसद तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव कानूनों के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए मिलकर काम करेंगे। निर्वाचन आयोग ने राज्य निर्वाचन आयुक्तों से अंतरराष्ट्रीय चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। साथ ही प्रस्ताव रखा कि ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन हर साल एक बार आयोजित किए जाएं, खासकर निर्वाचन आयोग की अध्यक्षता वाली अंतरराष्ट्रीय बैठकों के साथ।

सम्मेलन में राज्य निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दिए गए सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन निर्वाचन आयोग के संबंधित विभागों के नेतृत्व में कानूनी तथा तकनीकी अधिकारियों की संयुक्त टीम करेगी। राष्ट्रहित में सर्वोत्तम निर्णय लेने के लिए अगले तीन महीनों में राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार आगे की योजना तैयार कर निर्वाचन आयोग को सौंपी जाएगी।

यह सम्मेलन सहकारी संघवाद को मजबूत करने तथा चुनाव प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे चुनावी प्रबंधन में तकनीकी तथा कानूनी समन्वय बढ़ेगा और लोकतंत्र की नींव और मजबूत होगी।
 

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