मंत्रियों-विधायकों को नियंत्रित करना सीएम की जिम्मेदारी: डीके शिवकुमार

मंत्रियों-विधायकों को नियंत्रित करना सीएम की जिम्मेदारी: डीके शिवकुमार


बेंगलुरु, 24 फरवरी। कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि मंत्रियों और विधायकों को नियंत्रित करना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है।

बेंगलुरु स्थित अपने आवास के पास मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने नेतृत्व परिवर्तन और दलित मुख्यमंत्री के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मंत्रियों और विधायकों को नियंत्रित करना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। पार्टी अध्यक्ष के तौर पर मैं पार्टी से जुड़े मामलों की जानकारी हाईकमान को देता हूं।”

शिवकुमार ने बताया कि वे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली से नियमित रूप से चर्चा करते हैं, जो मुख्यमंत्री के समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने कहा, “जारकीहोली वरिष्ठ नेता हैं और मेरे साथ कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। हम सप्ताह में एक बार बात करते हैं। हम समान विचारधारा के हैं और पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की रणनीति बना रहे हैं।”

समाज कल्याण मंत्री एच. सी. महादेवप्पा द्वारा मुख्यमंत्री पद खाली होने की स्थिति में दलित मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग पर शिवकुमार ने तंज कसते हुए कहा कि शायद महादेवप्पा को नेतृत्व परिवर्तन की कोई जानकारी हो, इसलिए उन्होंने यह मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, “मैंने उनका बयान देखा है। इसके अलावा कोई चर्चा नहीं है। चूंकि वे भी हाईकमान का हिस्सा हैं, उन्हें शायद किसी बदलाव की जानकारी हो। मुझे ऐसी कोई सूचना नहीं है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी हाईकमान ने उन्हें और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को दिल्ली तलब किया है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई बुलावा नहीं मिला है। हालांकि, विभागीय कार्यों के सिलसिले में उन्हें दिल्ली जाना है।

उन्होंने बताया कि शहरी विकास योजनाओं के लिए एक लाख करोड़ रुपये आवंटित किए जा रहे हैं और वे दूसरे व तीसरे दर्जे के शहरों के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार कराने पर चर्चा करेंगे।

कुछ विधायकों द्वारा नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग संबंधी पत्र लिखे जाने पर शिवकुमार ने कहा कि वे नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने के पक्षधर हैं।

उन्होंने कहा, “हर किसी की मंत्री बनने की इच्छा होती है। नई पीढ़ी और नए विचारों को अवसर मिलना चाहिए। मैं 36 वर्षों से मंत्री रहा हूं। कब तक हम पदों पर बने रहेंगे? अंतिम फैसला पार्टी ही करेगी।” हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल विस्तार का निर्णय मुख्यमंत्री का अधिकार है।
 
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