तिरुवनंतपुरम, 24 फरवरी। वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ और कोंकण रेलवे के पूर्व चेयरमैन ई. श्रीधरन ने केरल के लिए सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का संशोधित प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि नई योजना पहले की तुलना में तेज, कम लागत वाली और न्यूनतम भूमि अधिग्रहण वाली होगी।
यह कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक प्रस्तावित है और नए प्लान में पथानामथिट्टा और मलप्पुरम को भी शामिल किया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार ट्रेनें अधिकतम 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी, जिससे पूरे मार्ग की यात्रा लगभग 3 घंटे 20 मिनट में पूरी हो सकेगी। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 56,500 करोड़ रुपए बताई गई है।
मीडिया को जानकारी देते हुए श्रीधरन ने कहा कि परिचालन ऊर्जा लागत का एक-तिहाई हिस्सा बचाया जा सकेगा, क्योंकि बिजली का उत्पादन परियोजना संचालित करने वाली कंपनी स्वयं करेगी।
उन्होंने कहा कि हाई-स्पीड रेलवे एक सेवा-उन्मुख व्यवस्था होगी और किराया न्यूनतम व्यवहार्य स्तर पर रखा जाएगा, जो मोटे तौर पर एसी चेयर कार किराए के बराबर होगा। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, समयपालन और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
डिजाइन के अनुसार नियमित स्टेशनों पर ट्रेन एक मिनट और प्रमुख स्टेशनों पर दो मिनट रुकेगी। प्रस्तावित मार्ग का अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड वायाडक्ट और सुरंगों से होकर गुजरेगा, जिससे बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी सीमित रहेगा।
श्रीधरन ने बताया कि उनके पहले प्रस्ताव पर सीमित प्रगति के बाद यह संशोधित योजना तैयार की गई है और इसे जल्द ही भारत सरकार के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार अलग क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर (आरआरटीसी) परियोजना को आगे बढ़ा रही है। राज्य मंत्रिमंडल इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक तेज क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली विकसित करने की योजना है। प्रारंभिक कार्यों के लिए बजट प्रावधान भी किया जा चुका है।
दो समानांतर प्रस्ताव केरल की बढ़ती परिवहन चुनौतियों से निपटने के अलग-अलग दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। जहां श्रीधरन की योजना उच्च गति और एलिवेटेड संरचना के जरिए लागत नियंत्रित करने पर केंद्रित है, वहीं राज्य सरकार की आरआरटीसी योजना प्रमुख शहरी केंद्रों को जोड़ने वाली एक समेकित क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।
दोनों परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अभी अंतिम रूप में नहीं आई है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि नीति स्तर पर किस मॉडल को प्राथमिकता मिलती है और केरल के परिवहन ढांचे में कौन सा प्रस्ताव आगे बढ़ता है।