भारत में हवाई यात्रा को मिलेगी रफ्तार! वैकल्पिक एयरपोर्ट्स 2026 तक 4 करोड़ यात्रियों को संभालेंगे, भीड़ होगी कम

भारत में अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की क्षमता बढ़कर 2026 में 4 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद


नई दिल्ली, 24 फरवरी। भारत में अल्टरनेट एयरपोर्ट्स की संयुक्त क्षमता बढ़कर 2026 के अंत तक करीब 4 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

अल्टरनेट एयरपोर्ट्स को मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई के मुख्य हवाई अड्डों पर ट्रैफिक को कम करने के लिए बनाया जाता है।

क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि यह एयरपोर्ट्स पुराने हवाई अड्डें, जो कि शहर के व्यस्त इलाकों में अपनी पूरी क्षमता पर ऑपरेट करते हैं, उनके बढ़ते हुए एयर ट्रैवल को संभालने में अहम भूमिका निभाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले चार वित्तीय वर्षों में, इन अल्टरनेट एयरपोर्ट के और विस्तार से इनकी कुल क्षमता बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 4.5-5 करोड़ यात्रियों को संभालने लायक हो जाएगी।

मौजूदा एयरपोर्ट्स पर भीड़भाड़ के कारण उत्पन्न हुई दबी हुई मांग और कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ बढ़ते हुए कैचमेंट क्षेत्रों से इस वृद्धि को बल मिलेगा।

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए परिचालन में समय पर वृद्धि करना महत्वपूर्ण होगा।

क्रिसिल का विश्लेषण दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और गोवा सहित पुराने एयरपोर्ट्स के समान क्षेत्रों में स्थित चालू और आगामी अल्टरनेट एयरपोर्ट्स पर केंद्रित है।

एनसीआर और एमएमआर जैसे महानगरीय क्षेत्रों में, पुराने हवाई अड्डे पिछले वित्तीय वर्ष तक अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 87 प्रतिशत पर पहले से ही परिचालन कर रहे हैं।

स्थान की कमी के कारण, इन हवाई अड्डों में बड़े विस्तार परियोजनाओं की सीमित गुंजाइश है।

क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक अंकित हखू ने कहा कि महानगरों में स्थित अल्टरनेट एयरपोर्ट्स से वित्त वर्ष 2030 तक कुल क्षेत्रीय यातायात का 20-25 प्रतिशत हिस्सा संभालने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि इन नए एयरपोर्ट्स के लिए प्रारंभिक नियंत्रण अवधि के दौरान विमानन और गैर-विमानन दोनों प्रकार के राजस्व में वृद्धि करना महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई के पुराने हवाई अड्डे की विकास दर वित्त वर्ष 2017 के बाद क्षमता संबंधी बाधाओं के कारण धीमी रही, क्योंकि यह एयरलाइंस को व्यस्त समय के दौरान अतिरिक्त उड़ानें उपलब्ध नहीं करा सका।

इसके विपरीत, दिल्ली एयरपोर्ट का विकास उस दौरान लगातार जारी रहा। हालांकि, क्षेत्र में दूसरे हवाई अड्डे के विकास के बिना, दिल्ली को भी मध्यम अवधि में इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता।

इस बीच, कुछ अन्य महानगरों के हवाई अड्डों में अभी भी विकास की गुंजाइश है। बेंगलुरु और हैदराबाद के हवाई अड्डे पिछले वित्तीय वर्ष में अपनी डिजाइन क्षमता के लगभग 65 प्रतिशत पर काम कर रहे थे, जिससे विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है।
 
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