पानीपत के शिक्षाविद ने AI समिट में PM मोदी के विजन को सराहा, बोले- तकनीक ही विकास-पारदर्शिता की कुंजी

एआई समिट: पानीपत के शिक्षाविद ने पीएम मोदी के विजन का किया समर्थन, बोले-विकास को प्राथमिकता देना जरूरी


पानीपत, 23 फरवरी। नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट में भारत के तकनीकी भविष्य पर चर्चा केंद्र में रही। इस कार्यक्रम में देश और विदेश से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मंच पर भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित किया गया।

पानीपत के शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) सुशील कुमार मिश्रा ने इस पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन की सराहना की, जिसमें तकनीक को शासन व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया है। डॉ. मिश्रा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री लगातार डिजिटल सिस्टम के जरिए पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की बात करते रहे हैं।

उन्होंने आधार से जुड़े कल्याणकारी योजनाओं, बेहतर टैक्स कलेक्शन व्यवस्था और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार को उदाहरण के रूप में पेश किया। उनका कहना था कि तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार कम हुआ है और लोगों तक सुविधाएं सीधे पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा, “अगर भारत को वैश्विक महाशक्ति बनना है, तो उसे तकनीक के क्षेत्र में आगे रहना होगा।” उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि जो भारत पहले नई तकनीकों में पीछे था, अब वह नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। इतने बड़े स्तर पर एआई समिट का आयोजन दुनिया को भारत की क्षमता और दूरदृष्टि का संदेश देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि डिजिटल नवाचार का लाभ देश के 1.4 अरब लोगों तक पहुंचे। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और डिजिटल बैंकिंग के जरिए योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है।

डॉ. मिश्रा का मानना है कि स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, 5जी नेटवर्क का विस्तार और 6जी की तैयारी के साथ एआई आधारित सिस्टम गांवों तक प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे वैश्विक आयोजन भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करते हैं। विदेशी मेहमानों का स्वागत कर और अपनी तकनीकी क्षमता दिखाकर भारत खुद को एक उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर रहा है।

समिट के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस जरूरी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों को राष्ट्रीय एकता के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। घरेलू राजनीतिक मतभेदों के लिए संसद जैसे उचित मंच मौजूद हैं। जब भारत खुद को वैश्विक नेता के रूप में पेश कर रहा हो, तब सभी राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए।

डॉ. मिश्रा के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल बदलाव केवल सरकारी नीतियां नहीं हैं, बल्कि यह 1.4 अरब लोगों के भविष्य को आकार देने का रास्ता हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश के विकास को प्राथमिकता देना जरूरी है।
 

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