'डैडी' की पूजा भट्ट: रील लाइफ में नशा मुक्ति का संदेश, रियल लाइफ में शराब की लत से लड़ी जंग

'डैडी' की बेटी पूजा, रील लाइफ का किरदार और रीयल लाइफ की चुनौतियां, दिलचस्प है कहानी


मुंबई, 23 फरवरी। बॉलीवुड के 90 के दशक में एक नाम जो हर जगह सुनाई देता था, वह था अभिनेत्री पूजा भट्ट का। उन्होंने बेहद कम समय में फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन, उनकी लाइफ केवल फिल्मी सफर तक ही सीमित नहीं रही। पूजा ने अपनी निजी जिंदगी में भी कई चुनौतियों का सामना किया और उनमें से एक थी शराब की लत।

फिल्मी पर्दे, जैसे 'डैडी' मूवी के जरिए, जहां वह शराब छोड़ने की सलाह देती है, लेकिन असल जिंदगी में वह यही बात काफी देर से समझी और नशे के खिलाफ जंग लड़ी।

पूजा भट्ट का जन्म 24 फरवरी 1972 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मशहूर निर्देशक और निर्माता महेश भट्ट और मां किरन भट्ट हैं। पूजा के भाई राहुल भट्ट भी फिल्मों से जुड़े हैं। महेश भट्ट की दूसरी पत्नी सोनी राजदान से आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं। शुरुआती समय में पूजा और उनकी सौतेली मां और बहन के बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन वक्त के साथ ये रिश्ते सुधरे और अब पूजा अपने परिवार के काफी करीब हैं।

पूजा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत महज 17 साल की उम्र में फिल्म 'डैडी' से की थी। यह फिल्म 1989 में रिलीज हुई थी। फिल्म को महेश भट्ट ने निर्देशित किया था। फिल्म एक शराबी पिता (अनुपम खेर) और उसकी बेटी (पूजा भट्ट) के बीच के रिश्ते की कहानी है।

फिल्म में पूजा भट्ट ने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया था, जो अपने पिता को शराब पीने से रोकती है। ऐसी फिल्म करने के बावजूद वह खुद कई सालों तक शराब की लत से जूझती रही।

उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया कि एक वक्त था, जब उन्हें शराब की लत लगी थी। 45 साल की उम्र के बाद जब उन्हें लगा कि अब वह मरने की कगार पर हैं, तो उन्होंने शराब छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने खुद पर कंट्रोल किया। शराब छुड़ाने की इस जंग में पूजा ने खुद को मजबूत बनाया और फैंस के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं।

पूजा ने 1991 में फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' से हीरोइन के तौर पर डेब्यू किया था। फिल्म को खूब पसंद किया गया और वह रातों-रात स्टार बन गईं। उनकी और आमिर खान की जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा।

उन्होंने 'सड़क', 'चाहत', 'जख्म', 'सनम तेरी कसम' और 'प्यार दीवाने' जैसी कई फिल्मों में काम किया। उनके अपने फिल्मी सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। जब उनकी कई फिल्में नहीं चली, उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अभिनय के साथ-साथ डायरेक्शन और प्रोडक्शन की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने 'जिस्म', 'पाप', 'धोखा' और 'कजरारे' जैसी फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया।
 
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