कोलकाता, 23 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के नाम लिखे गए पत्र के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस की मंत्री शशि पांजा ने प्रधानमंत्री मोदी के पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे वोट बैंक की राजनीति करार दिया और केंद्र सरकार पर बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाया।
शशि पांजा ने कहा कि जब भी पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते हैं, तभी प्रधानमंत्री को राज्य की याद आती है। हमारा सवाल है कि क्या बंगाल की याद सिर्फ चुनाव के समय ही आती है? इससे राज्य के लोगों को अपमानित महसूस होता है। यह पूरी तरह वोट बैंक की राजनीति है। प्रधानमंत्री अपने पत्र में यह लिख सकते थे कि केंद्र सरकार बंगाल को दो लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि देगी। उन्होंने विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत लंबित भुगतान का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि बंगाल को मनरेगा के तहत 100 दिन के काम का बकाया भुगतान किया जाए, लेकिन अब तक यह राशि राज्य को नहीं मिली है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि आपने गरीबों का काम छीन लिया। जो पैसा घर बनाने के लिए मिलता है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी होती है, वह भी रोका गया। अगर ऐसा है तो प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में इन मुद्दों का जिक्र क्यों नहीं किया?
टीएमसी सरकार में मंत्री शशि पांजा ने कहा कि हिंदी के बाद देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बंगाली है, लेकिन भाजपा शासित डबल इंजन राज्यों में बंगाली भाषा बोलने वालों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में हिंसा और यहां तक कि खून-खराबा भी हुआ है। प्रधानमंत्री को इस पर भी स्पष्ट करना चाहिए कि बंगाली भाषा बोलने पर हमला क्यों होता है? भाजपा नेताओं के कुछ बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कथित तौर पर मछली खाने वालों को लेकर टिप्पणी की थी। बंगाल में मछली खाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। अगर कहीं मांस की दुकानों को बंद करने या प्रतिबंध लगाने की बात होती है, तो यह लोगों की खान-पान की स्वतंत्रता पर हमला है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बंगाल दौरे और महिला सुरक्षा पर दिए गए बयानों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पहले दिल्ली की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि दिल्ली को रेप कैपिटल कहा जाता है। जनवरी में सैकड़ों लड़कियों के लापता होने की खबरें आईं। इस पर क्या कदम उठाए गए? दिल्ली में सुरक्षा और आतंकी घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार को पहले राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति सुधारनी चाहिए, फिर बंगाल में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाने चाहिए। पांजा ने यह भी दावा किया कि शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर के मामले में बंगाल की स्थिति दिल्ली से बेहतर है।
प्रधानमंत्री मोदी के पत्र में 'जय श्री राम' के बजाय 'जय मां काली' लिखे जाने पर शशि पांजा ने कहा कि बंगाल में सभी धर्मों और भाषाओं का सम्मान किया जाता है। हम किसी को खुश करने के लिए किसी देवी-देवता या ईश्वर का नाम नहीं लेते। यहां सांप्रदायिक सौहार्द का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाती है। पांजा ने क्रिसमस के दौरान कथित रूप से कुछ राज्यों में सांता क्लॉज और क्रिसमस ट्री हटाए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है। बंगाल में सभी त्योहार मनाए जाते हैं, चाहे वह दुर्गा पूजा हो या क्रिसमस।
शशि पांजा ने आगे कहा कि भाजपा बंगाल को चुनाव के मद्देनजर निशाना बना रही है। चुनाव खत्म होते ही ये लोग फिर दिखाई नहीं देंगे। बंगाल की जनता सब समझती है।