हथकरघा सेक्टर में क्रांति! 'परिष्कृति' प्रदर्शनी ने खत्म किए बिचौलिए, कारीगरों को मिला सीधा लाभ और पहचान

बिना बिचौलिए ग्राहकों तक पहुंच रहे हथकरघा उत्पाद, हैंडलूम सेक्टर को मिल रहा बढ़ावा


नई दिल्ली, 23 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 22 से 28 फरवरी 2026 तक 'परिष्कृति' हथकरघा प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष प्रदर्शनी का उद्देश्य देशभर के हथकरघा कारीगरों और बुनकरों को एक प्रतिष्ठित मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकें। प्रदर्शनी में 20 राज्यों के अलग-अलग स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें अधिकतर प्रतिभागी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं।

इस दौरान, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि 'परिष्कृति' एक पहल है, जिसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों से हथकरघा क्षेत्र से जुड़े लोगों को दिल्ली के इस प्रमुख स्थान पर लाया गया है, जहां उनके उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।

उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी का आयोजन ऐसे स्थान पर किया गया है जहां प्रीमियम वर्ग के ग्राहक बड़ी संख्या में आते हैं। इससे कारीगरों और प्रतिभागियों को न केवल बिक्री का लाभ मिलता है, बल्कि उन्हें बड़े बाजार से परिचित होने का अवसर भी मिलता है। यह प्रदर्शनी इसी स्थान पर दूसरी बार आयोजित की जा रही है। पिछले वर्ष भी इसका सफल आयोजन यहीं हुआ था।

डॉ. बीना ने आगे कहा कि मंत्रालय की कोशिश है कि यह आयोजन हर वर्ष नियमित रूप से हो, ताकि प्रदर्शनी की एक अलग पहचान और रिकॉर्ड वैल्यू बने। उनका कहना है कि ऐसे मार्केटिंग इवेंट में बिक्री तो होती ही है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बाजार जागरूकता और ब्रांड पहचान का निर्माण होता है। यह मंच गांव के बुनकरों को शहर के प्रीमियम ग्राहकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

इसके साथ ही, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अंगिका कुशवाहा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उन्हें वर्ष 2023 में हथकरघा उत्पादों के मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इस प्रदर्शनी में वह बनारस का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यहां सीधे दर्शकों और खरीदारों से संपर्क स्थापित हो रहा है, जिससे ग्राहकों को उचित मूल्य पर शुद्ध और प्रमाणिक उत्पाद मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके स्टॉल पर बनारसी साड़ी, ब्रोकेड, लहंगा, दुपट्टा और शॉल सहित कई पारंपरिक उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के लिए वस्त्र मंत्रालय और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से कारीगरों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता खोकन नंदी ने बताया कि बंगाल की जामदानी साड़ी विश्वभर में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि वह बचपन से ही इस कला से जुड़े हुए हैं और उनके गांव में पहले बड़ी संख्या में लोग यह काम करते थे। हालांकि समय के साथ कारीगरों की संख्या कम होती गई, क्योंकि उन्हें अपेक्षित मेहनताना नहीं मिल पा रहा था।

उन्होंने कहा कि वस्त्र मंत्रालय और भारत सरकार के सहयोग से अब इस क्षेत्र को नई गति मिल रही है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने सेवा केंद्र और मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि इस समर्थन से कारीगरों को नई उम्मीद मिली है।

खोकन नंदी ने यह भी बताया कि उनके उत्पाद पूरी तरह शुद्ध और हाथ से बने होते हैं, जिनमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती। बेहतरीन डिजाइन और पारंपरिक शिल्पकला उनकी पहचान है।
 

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