शंकराचार्य पॉक्सो मामले पर सियासी उबाल, अजय राय ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर की निष्पक्ष जांच की मांग

शंकराचार्य प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र


लखनऊ, 23 फरवरी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा। इस पत्र के जरिए उन्होंने ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के विरुद्ध दर्ज पॉक्सो (पोक्सो) प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने धार्मिक स्वायत्तता की संवैधानिक मर्यादा के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए अजय राय ने पत्र में लिखा कि विभिन्न समाचार माध्यमों में यह जानकारी सामने आई है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में दर्ज की गई है। न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना हर नागरिक और शासन का कर्तव्य है, लेकिन इस प्रकरण के समय और परिस्थितियों ने समाज में कई तरह के सवाल और आशंकाएं पैदा कर दी हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने पूर्व में महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ के मामले में राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें माघ मेले में स्नान से रोके जाने और उनके साथ आए बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं भी सामने आईं, जिनकी व्यापक आलोचना हुई थी। ऐसे परिप्रेक्ष्य में वर्तमान आपराधिक कार्रवाई का समय सार्वजनिक विमर्श का विषय बन गया है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि, परिस्थितियों और संभावित प्रेरक तत्वों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि मामला पूरी तरह विधिसम्मत है तो पारदर्शी जांच से सत्य स्वतः सामने आ जाएगा, लेकिन यदि इसके पीछे किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव या दुर्भावना है तो उसका समय रहते निराकरण होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में जांच कराई जाए, ताकि जनविश्वास मजबूत हो सके।

संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लेख करते हुए अजय राय ने कहा कि ये प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं को अपने मामलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में सर्वोच्च आध्यात्मिक पदों में से एक है और इसकी गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि आपराधिक कानून का उपयोग दमन या प्रतिशोध के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। असहमति या आलोचना को दंडात्मक शक्ति के माध्यम से दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आग्रह किया कि आपराधिक प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए तथा धार्मिक पद की गरिमा को आपराधिक विवादों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी शीर्ष धर्माचार्य के खिलाफ उत्पन्न परिस्थितियों से शासन और आध्यात्मिक परंपरा के बीच टकराव की धारणा बनती है, तो इससे व्यापक धार्मिक समाज में असंतोष और पीड़ा की भावना पैदा हो सकती है। ऐसी किसी भी आशंका का समय रहते समाधान सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक संतुलन के लिए आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अजय राय ने कहा कि समाज में यह चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में की जा रही कार्रवाई कहीं अनावश्यक कठोरता या प्रतिशोधात्मक भावना से प्रेरित तो नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी धारणा बनती है तो इससे न केवल राज्य सरकार की छवि प्रभावित होती है, बल्कि केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आस्था, संवैधानिक अधिकारों और शासन की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। देश की जनता यह विश्वास चाहती है कि भारत में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को संरक्षण नहीं मिलेगा। अजय राय ने प्रधानमंत्री से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने की अपेक्षा जताई है।
 

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