नई दिल्ली, 23 फरवरी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साफ कर दिया है कि हाल ही में जारी किए गए उन नियमों में बदलाव की कोई योजना नहीं है जो बैंकों द्वारा प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकरों को दिए जाने वाले कर्ज से जुड़े हैं। यह जानकारी सोमवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी।
इस महीने की शुरुआत में जारी नए नियमों के तहत आरबीआई ने ब्रोकरों को दी जाने वाली बैंक गारंटी के लिए कोलेटरल (गिरवी) की शर्तें कड़ी कर दी हैं। साथ ही, बैंकों को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरों को कर्ज देने से रोक दिया गया है। ये नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे।
इन नियमों के बाद पिछले सप्ताह ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। बाजार में यह चिंता जताई जा रही है कि नए नियमों से ब्रोकरों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम भी घट सकता है। ब्रोकरों ने इन नियमों की समीक्षा की मांग करते हुए बाजार नियामक को एक पत्र भी भेजा है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बोर्ड बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये नियम व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा, "इन नियमों में किसी बदलाव पर विचार नहीं किया जा रहा है।"
गवर्नर ने यह भी बताया कि आरबीआई ने भारत के महंगाई लक्ष्य (इन्फ्लेशन टार्गेटिंग) ढांचे को लेकर अपनी सिफारिशें सरकार को भेज दी हैं। यह समीक्षा मार्च के अंत तक होनी है। हालांकि उन्होंने सिफारिशों का विवरण साझा नहीं किया।
भारत में आरबीआई को खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक का दायरा तय है। इस लक्ष्य की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
हाल ही में भारत ने खुदरा महंगाई के आंकड़ों की गणना पद्धति में बदलाव किया है, जिसमें महंगाई मापने वाली टोकरी में खाद्य पदार्थों का हिस्सा कम किया गया है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि इन बदलावों से आरबीआई के महंगाई लक्ष्य के रुख पर अपने आप कोई असर नहीं पड़ेगा।