भारत के मुस्लिम धर्मगुरु तालिबान के महिला कानून पर भड़के, बोले- ऐसे काले कानून हैं सिर्फ फिजूलशाही

तालिबान सरकार के नए कानून का भारत के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया विरोध


अयोध्या/बरेली, 23 फरवरी। भारत के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अफगानिस्तान में महिलाओं को लेकर तालिबान सरकार के नए कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कोई काम नहीं है, वे फिजूल तरीके से अपना कानून बनाते हैं। हिंसा कहीं भी नहीं होनी चाहिए।

अयोध्या के विवादित ढांचे के मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा, "ये सब काले कानून हैं। जिन लोगों को कोई काम नहीं है, वे फिजूल तरीके से अपना कानून बनाते हैं। हिंसा कहीं भी नहीं होनी चाहिए। सबके साथ इंसाफ होना चाहिए। जहां हिंसा है, वहां रोक लगनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "किसी भी धर्म और किसी भी जाति के लोग हों, सर्व समाज में हिंसा मना है। लोग हिंसा पर कानून बनाते हैं, तालिबान ने भी कानून बनाया है। हम हिंसा को सही मानते ही नहीं हैं, क्योंकि हम भी मुसलमान हैं और मजहब से जुड़े हुए हैं। हिंसा किसी के साथ नहीं होनी चाहिए। लोगों के बीच अच्छे रिश्ते होने चाहिए। जब रिश्ते अच्छे होंगे तो हिंसा दूर चली जाएगी। धर्म पर चलने वाले मौलाना भी सबको गले लगाने की बात करें, हिंसा के लिए कोई कानून नहीं होता है।"

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी तालिबानी कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा, "अभी शौहर, बच्चों और बीवी के ताल्लुक से मारने-पीटने के संबंध में जो हुक्मनामा तालिबान ने जारी किया है, तो ये अमल फैसला हिंसा पर आधारित है।"

उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान में तालिबान की दूसरी बार हुकूमत बनी है। तालिबान का चेहरा हमेशा दहशतगर्दाना रहा है। हमने कभी भी तालिबान को तस्लीम नहीं किया और तालिबान को हमने हमेशा आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाया व आतंकवादी संगठन ही माना है।"

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, "तालिबान ने जब हुकूमत संभाली तो उन्होंने अपने तरीकों में काफी तब्दीलियां कीं। जब इस बात का ऐलान किया कि अफगानिस्तान की सरजमीं भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी, तो उस वक्त हमारे लब और लहजे में थोड़ी नरमी आई। अब तालिबान अफगानिस्तान को विकास की राह पर ले जाना चाहता है, मगर वक्त-बेवक्त अपनी सख्ती का अमल दिखाता रहता है।"
 
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