नारी शक्ति का महाकुंभ! 7-8 मार्च को दिल्ली के विज्ञान भवन में 'नारी से नारायणी' राष्ट्रीय सम्मेलन

महिला शक्ति पर मंथन : दिल्‍ली के विज्ञान भवन में 'नारी से नारायणी' सम्मेलन


गाजियाबाद, 22 फरवरी। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 7-8 मार्च को 'नारी से नारायणी' विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्र सेविका समिति, विद्वत परिषद तथा दिल्ली के अपने सरण्या न्‍यास के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है।

राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. शरद रेणु ने आईएएनएस से बातचीत में जानकारी देते हुए बताया कि इस सेमिनार की पूर्व तैयारी के तहत देशभर में विभिन्न स्तरों पर संगोष्ठियों और विचार-विमर्श कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम राष्ट्र सेविका समिति, उत्कृष्ट परिषद तथा दिल्ली के अपने सरण्य न्यायालय के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। इन पूर्व-संगोष्ठियों में विश्वविद्यालयों की शोध छात्राएं, प्राध्यापक, विद्वान और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। सम्मेलन के अंतर्गत शक्ति, भक्ति, चेतना और प्रेरणा जैसे आठ विषयों पर गहन संवाद और शोधपत्र वाचन किया जा रहा है।

डॉ. शरद रेणु ने कहा कि 'नारी से नारायणी' की अवधारणा भारतीय चिंतन पर आधारित है, जिसमें विकास की यात्रा 'व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से राष्ट्र और विश्वकल्याण' तक विस्तृत होती है। जब नारी स्वयं को राष्ट्र और विश्व कल्याण के लिए तैयार करती है, तब वह अपने दायित्वों को व्यापक दृष्टि से समझती है। इस सम्मेलन में भाग लेने वाली महिलाएं अपने-अपने सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए संकल्पित हैं। सेमिनार से प्राप्त निष्कर्षों को संकलित कर भारत सरकार को प्रेषित किया जाएगा, ताकि विकसित राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आ सके।

समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका सुनीता हलदेकर ने कहा कि 7 और 8 मार्च को आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सेमिनार नहीं, बल्कि एक व्यापक अभियान है। भारत की सबसे महत्वपूर्ण इकाई परिवार है और परिवार की मेरुदंड महिला है। भारतीय नारी ने सदैव अपने जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण किया है। इस सेमिनार का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की दिशा में सकारात्मक मार्ग प्रदान करना है। महिलाओं के सशक्तीकरण पर केवल चर्चा की आवश्यकता नहीं, बल्कि उनकी अंतर्निहित शक्ति को पहचानकर उसे संगठित और सही दिशा देने की जरूरत है।

अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख डॉ. रूपा रावल ने कहा कि महिलाओं में अपार शक्तियां निहित हैं और उन्हें समाज व राष्ट्रहित में जागृत करना ही समिति का उद्देश्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प के साथ विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक प्रयास है। इंटरनेशनल विमेंस डे के अवसर पर आयोजित यह सेमिनार महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां वे राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार रख सकेंगी।

अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका अलका इनामदार ने कहा कि प्रत्येक नारी के भीतर एक ‘नारायणी’ निहित है और उसे बाहर से सशक्त बनाने की आवश्यकता नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने की जरूरत है। सनातन परंपरा में नर और नारी को परस्पर पूरक माना गया है, प्रतिस्पर्धी नहीं। समाज निर्माण में स्त्री की भूमिका विशेष है, क्योंकि वह सृजन, पालन और संस्कारों की वाहक है। उन्होंने कहा कि प्रगति केवल भौतिक नहीं, बल्कि मूल्याधारित और संतुलित होनी चाहिए।

वहीं, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनीला सोवनी ने कहा कि नारी जब ‘नारायणी’ के भाव तक पहुंचती है, तो उसका चिंतन केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र और विश्वहित का हो जाता है। 7 और 8 मार्च को आयोजित राष्ट्रीय परिषद में राजनीति, शिक्षा, उद्योग, विज्ञान और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं एक मंच पर आकर राष्ट्रीय विकास की दिशा में अपने विचार साझा करेंगी। उन्होंने कहा कि यह परिषद आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम होगी।
 
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