‘छोटे केरल’ से ‘ग्रेट केरल’ की ओर बढ़ेगा राज्य: सीएम पिनराई विजयन

‘छोटे केरल’ से ‘ग्रेट केरल’ की ओर बढ़ेगा राज्य: सीएम पिनराई विजयन


तिरुवनंतपुरम, 21 फरवरी। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार को कहा कि राज्य अब “छोटे केरल” की मानसिकता से बाहर निकलकर “महान केरल” के विजन को अपनाएगा और अपनी ताकत के दम पर आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने यह बात तिरुवनंतपुरम में आयोजित केरल अध्ययन के पांचवें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के उद्घाटन अवसर पर कही। दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्देश्य राज्य के विकास के अगले चरण के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना है।

विजयन ने कहा कि यह मंच रचनात्मक संवाद का अवसर प्रदान करेगा, जो आने वाले वर्षों में केरल की विकासात्मक छलांग का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केरल किसी की दया या सहायता का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि आत्मनिर्भरता, आधुनिकीकरण और समावेशी विकास के जरिए अपनी राह स्वयं तय करेगा।

उन्होंने मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की क्षमताओं पर सामूहिक विश्वास जरूरी है। उभरती आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए दूरदर्शी सोच अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक पुनर्जागरण से प्रेरित कम्युनिस्ट आंदोलन ने केरल की प्रगतिशील दिशा तय करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। हर चरण में आंदोलन ने समाज का मार्गदर्शन करते हुए जरूरी बदलावों को अपनाया, जो अप्रासंगिक हो चुका था उसे छोड़ा और आवश्यक नवीनीकरण किया। उन्होंने कहा कि विकास के नए चक्र की तैयारी में यही लचीला और अनुकूलनशील दृष्टिकोण महत्वपूर्ण रहेगा।

विजयन ने कहा कि ‘नया केरल’ बनाने की जिम्मेदारी किसी एक राजनीतिक दल की नहीं है, बल्कि यह व्यापक सहयोग की साझा जिम्मेदारी है। सम्मेलन में शोधकर्ताओं, योजनाकारों और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाकर भविष्य की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

उन्होंने विकास के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने और गलत सूचनाओं का मुकाबला करने की जरूरत पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल अध्ययन कांग्रेस की परिकल्पना महान नेता ई. एम. एस. नंबूदरीपाद ने की थी। समय के साथ यह राज्य की दीर्घकालिक नीतियों पर चिंतन का एक नियमित मंच बन गया है।

उन्होंने कहा कि विश्व में बहुत कम राजनीतिक व्यवस्थाएं ऐसी हैं जो किसी राज्य के भविष्य पर इतने व्यवस्थित और बहुआयामी अध्ययन करती हों और उन्हें कल्याण व विकास कार्यक्रमों में रूपांतरित करती हों।

शैक्षणिक शोध को आम जनता की चिंताओं से जोड़ते हुए यह सम्मेलन अकादमिक जगत और समाज के बीच की दूरी कम करने का प्रयास करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही मॉडल केरल को “महान केरल” बनने की दिशा में आगे बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
 

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