पाकिस्तान का आर्थिक हाल बेहाल! निवेश-जीडीपी अनुपात 13.8% के साथ एशिया में सबसे कम, पड़ोसियों से भी पिछड़ा

पाकिस्तान का निवेश-जीडीपी अनुपात 13.8 प्रतिशत के साथ एशिया में सबसे कम: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 21 फरवरी। पाकिस्तान का निवेश-से-जीडीपी अनुपात 13.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो 2025 में बांग्लादेश के 22.4 प्रतिशत से काफी कम है। एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आंकड़े के साथ पाकिस्तान एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम निवेश करने वाला देश बन गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों जैसे भारत और वियतनाम में निवेश स्तर 30 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, जबकि पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2022 में अपने उच्चतम स्तर पर भी केवल 15.6 प्रतिशत निवेश अनुपात हासिल किया था।

‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हाइब्रिड और बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था के तहत व्यापक आर्थिक स्थिरता के दावों के बावजूद निवेशकों का भरोसा और वास्तविक निवेश परिणाम कमजोर बने हुए हैं। इसका मुख्य कारण संरचनात्मक बाधाओं का दूर न होना बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी औद्योगिक परियोजना की स्थापना के लिए अब भी लगभग 25 नियामकीय मंजूरियों की आवश्यकता होती है, जिससे परियोजनाओं की समयसीमा लंबी हो जाती है और अनिश्चितता बढ़ती है।

कॉरपोरेट क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी तौर पर निवेश सुविधा परिषद (इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल) के प्रदर्शन पर निराशा जताई है। यह परिषद ‘सिंगल-विंडो’ प्रणाली के रूप में लालफीताशाही कम करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। हालांकि इसके नेतृत्व को अनुशासित और क्रियान्वयन-उन्मुख माना जाता है, लेकिन कारोबारी प्रतिनिधियों का कहना है कि अत्यधिक कठोरता के कारण निवेश रणनीति में नवाचार सीमित हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान का निवेश अनुपात वित्त वर्ष 2022 के 15.6 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024 में 13.1 प्रतिशत रह गया था, जो वित्त वर्ष 2025 में आंशिक सुधार के साथ 13.8 प्रतिशत पर पहुंचा। इसके विपरीत, भारत में यह अनुपात 32–35 प्रतिशत और वियतनाम में 30–33 प्रतिशत के बीच बना हुआ है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 15 प्रतिशत से कम का निवेश स्तर पाकिस्तान की आर्थिक विकास क्षमता को क्षेत्रीय देशों की तुलना में काफी सीमित कर देता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का निर्यात अक्टूबर में 2.85 अरब डॉलर से घटकर दिसंबर में 2.32 अरब डॉलर रह गया था, हालांकि जनवरी 2026 में यह बढ़कर 3.06 अरब डॉलर हो गया। वहीं आयात 5 से 6 अरब डॉलर के आसपास उच्च स्तर पर बना रहा, जिससे व्यापार घाटा लगातार बड़ा बना हुआ है।

पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मार्केट इकोनॉमी (प्राइम) की रिसर्च इकोनॉमिस्ट मरियम अयूब ने कहा, “पाकिस्तान का निवेश अनुपात क्षेत्र से संरचनात्मक रूप से अलग-थलग है। झटकों का सामना करने वाली अर्थव्यवस्थाएं भी पाकिस्तान से कहीं अधिक निवेश बनाए रखती हैं, जो अस्थायी कमजोरी के बजाय गहरे घरेलू अवरोधों की ओर संकेत करता है।”
 

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