उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का बड़ा ऐलान: CSR राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र, संविधान के तमिल-गुजराती संस्करण भी हुए जारी

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने CSR को बताया राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र, संविधान के तमिल-गुजराती संस्करण का किया विमोचन


नई दिल्ली 21 फरवरी। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व अब व्यवसाय का गौण हिस्सा नहीं रह गया है, यह राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र बिंदु है।

उन्होंने कहा कि यह वह स्थान है जहां उद्यमशीलता सहानुभूति से मिलती है और विकास को एक उद्देश्य मिलता है। भारत व्यापक विकास, समावेशी समृद्धि और अविवादित स्थिरता के लिए प्रयासरत है। ऐसे में सीएसआर एक लचीले और न्यायसंगत भविष्य के निर्माण में एक वास्तविक परिवर्तनकारी शक्ति साबित हो सकता है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि हम उस दौर में मिल रहे हैं, जब देश में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहे हैं। जो पहले था और जो आज है, उसे देखकर हम अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। इतनी तीव्र गति से विकास हो रहा है और हम सभी को भारतीय होने पर गर्व है। भारत केवल विकास नहीं कर रहा है, बल्कि अपने भविष्य की राह पर अग्रसर है। पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रगतिशील नेतृत्व में भारत ने संरचनात्मक सुधारों को देखा है।

वहीं, उपराष्ट्रपति ने भारत के संविधान के गुजराती और तमिल भाषाओं में विमोचन और विधि शब्दावली का आठवां संस्करण (अंग्रेजी से हिंदी) का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के प्रकाशन के अवसर पर, तमिल और गुजराती में 106वें संशोधन अधिनियम तक अपडेट किए गए, आठवें संस्करण और कानूनी शब्दावली के साथ, यह सम्मान हमारे साथ साझा किया गया।

उन्होंने कहा, "मेरे प्रिय बहनों और भाइयों, तमिल और गुजराती संस्करणों का विमोचन एक महत्वपूर्ण समारोह है। आज का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। मातृभाषा वह पहली भाषा है जिसे हम सुनते हैं। वह भाषा जिसमें माताएं बोलती हैं, वह भाषा जो हमारी भावनाओं और संस्कृति की पहली अभिव्यक्ति है। यह पीढ़ियों को साहित्य से जोड़ती है और ज्ञान का संग्रह है।
 

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