नई दिल्ली, 20 फरवरी। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि भारत ने गुरुवार को वाशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पर्यवेक्षक देश के रूप में हिस्सा लिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्ताव के तहत गाजा में शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हमने वाशिंगटन डीसी में बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। हमने राष्ट्रपति ट्रम्प की गाजा पीस प्लान पहल का स्वागत किया है, साथ ही यूएनएससी के प्रस्ताव 2803 के तहत चल रहे सभी प्रयासों का समर्थन भी किया है।"
इस उद्घाटन बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल थे। भारत का प्रतिनिधित्व इस बैठक में वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स, नमग्या खम्पा ने किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक में हस्ताक्षर किए गए संयुक्त बयान पर भारत की क्या स्थिति थी, जिसमें इजरायल द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में "एकतरफा" कदमों पर चिंता जताई गई थी।
जायसवाल ने कहा, "आपको पता होगा कि यह आम तौर पर यूएन में होने वाले समझौते जैसा दस्तावेज नहीं था। इस मामले में हमारी स्थिति हाल ही में भारत-अरब लीग मंत्री स्तरीय संयुक्त बयान में व्यक्त की गई थी।"
वे 31 जनवरी को जारी 'दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक का दिल्ली घोषणा पत्र' का हवाला दे रहे थे। इस बैठक में अरब देशों के विदेश मंत्रियों और अरब लीग के महासचिव ने भाग लिया था। बैठक से पहले 30 जनवरी को भारत-अरब वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी।
फिलिस्तीन के मुद्दे पर घोषणा पत्र में कहा गया, "दोनों पक्ष मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण, व्यापक और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, संबंधित यूएन प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुसार अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। उन्होंने 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु, स्वतंत्र और सक्षम फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन किया, जो इजरायल के साथ शांति से सह-अस्तित्व में रहेगा। दोनों पक्षों ने फिलिस्तीनी लोगों के अपरिवर्तनीय अधिकारों के पालन का समर्थन किया।"