नई दिल्ली, 20 फरवरी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नवंबर 2023 में हुई एक क्रूर हत्या के मामले में प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की एक महिला कमांडर के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। यह मामला एक 'जन अदालत' में अपहरण और हत्या से जुड़ा है, जिसमें गांववाले अमर सिंह उइके को बेरहमी से मार डाला गया था।
एनआईए ने जगदलपुर की अपनी विशेष अदालत में दाखिल चार्जशीट में आरोपी राजे कांगे उर्फ मालती उर्फ निर्मला पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। राजे कांगे 'रावघाट एरिया कमेटी' की कमांडर हैं और माओवादी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
एनआईए की जांच में सामने आया कि नवंबर 2023 में नारायणपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के गोमे गांव के पास माओवादियों ने एक जन अदालत लगाई। इसमें अमर सिंह उइके को 'पुलिस का मुखबिर' होने के आरोप में अपहरण कर लिया गया और क्रूर तरीके से हत्या कर दी गई। एनआईए ने स्थानीय पुलिस से मामला अपने हाथ में लेने के बाद गहन जांच की। इसमें गवाहों के बयान, दस्तावेजों का संग्रह, फोरेंसिक विश्लेषण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पाया गया कि आरोपी इस साजिश की मुख्य सूत्रधार थी। माओवादियों ने पीड़ित पर पुलिस को सूचना देने का आरोप लगाकर यह कृत्य किया।
केस (आरसी-10/2024/एनआईए/आरपीआर) की आगे की जांच से पता चला कि यह घिनौना अपराध गांववालों में दहशत फैलाने, उन्हें माओवादी विचारधारा का विरोध करने या संगठन के निर्देशों की अवहेलना करने से रोकने के उद्देश्य से किया गया। जन अदालतों के जरिए माओवादी अक्सर ग्रामीणों पर आतंक का माहौल बनाते हैं, जिससे क्षेत्र में उनका नियंत्रण कायम रहता है।
एनआईए ने इस मामले को माओवादी इकोसिस्टम को कमजोर करने की अपनी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है। एजेंसी लगातार छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और अन्य प्रभावित राज्यों में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। हाल के वर्षों में एनआईए ने कई ऐसे मामलों में चार्जशीट दाखिल की हैं, जिसमें माओवादियों द्वारा राजनीतिक नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की हत्याएं शामिल हैं।
यह चार्जशीट छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती देती है। राज्य में सुरक्षा बलों के अभियानों और विकास कार्यों से माओवादी प्रभाव में कमी आई है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जन अदालतों और जबरन वसूली जैसी घटनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं। एनआईए की यह कार्रवाई पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और माओवादी आतंक को जड़ से खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और अन्य शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें भी कानूनी घेरे में लाया जाएगा।